लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के लिए लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से बुधवार को गिर गया.
हालांकि इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान संसद में काफ़ी हंगामा भी देखने को मिला.
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में कहा कि “स्पीकर ओम बिरला को नैतिकता न सिखाई जाए क्योंकि जब कांग्रेस पार्टी थी तो उनके स्पीकर के ख़िलाफ़ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के दौरान तत्कालीन स्पीकर सदन में बैठते थे जबकि ओम बिरला इस अविश्वास प्रस्ताव के आने के बाद से यहां नहीं आए हैं.”
वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उन्हें ‘सदन में बोलने नहीं दिया जाता’ है.
लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए 118 विपक्षी सांसदों के समर्थन से अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था.
विपक्षी सांसदों का दावा था कि ओम बिरला ने “पक्षपातपूर्ण व्यवहार” दिखाया है और उनका कार्यालय अपेक्षित निष्पक्षता बनाए रखने में विफल रहा है.
मंगलवार को लोकसभा के पीठासीन बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने इस प्रस्ताव पर बहस की अनुमति दी और बहस के लिए 10 घंटे का समय दिया गया था.
न्यूज़ एजेंसी एएनआई के ताज़ा अपडेट के अनुसार, अविश्वास प्रस्ताव पर गर्मागरम बहस के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा को संबोधित किया। अमित शाह ने अपने कड़े और स्पष्ट संबोधन में विपक्ष के सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया.
उन्होंने कहा कि स्पीकर ओम बिरला का आचरण पूरी तरह से निष्पक्ष और संवैधानिक नियमों के दायरे में रहा है. शाह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यह प्रस्ताव केवल सस्ती लोकप्रियता हासिल करने और सदन का कीमती समय बर्बाद करने के इरादे से लाया गया है.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अध्यक्ष की कुर्सी पर सवाल उठाना संसदीय लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा नहीं है.
