रांची: झारखंड की राजधानी रांची स्थित प्रमुख सरकारी सदर अस्पताल में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर प्रतिमा कुमारी की डिलिवरी के दौरान हुई मौत पर राज्य भर की सीएचओ में आक्रोश है.
रांची जिले में कांके प्रखंड अंतर्गत कुम्हारिया की कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर प्रतिमा कुमारी मामूली प्रसव पीड़ा के बाद चेकअप के लिए सदर अस्पताल आईं थीं.
झारखंड राज्य सीएचओ संघ की प्रदेश अध्यक्ष सोनी प्रसाद ने बताया कि चेकअप के लिए सदर अस्पताल आईं प्रतिमा कुमारी को अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी गई. उनका सदर अस्पताल की जगह एक निजी अस्पताल में अल्ट्रा सोनोग्राफी कराई गई.
इसके बाद उनके अटेंडेट को एक यूनिट ब्लड इंतजाम करने को कहा गया और इस बीच बिना अनुमति के प्रतिमा का ऑपेरशन कर दिया गया. इस दौरान काफी रक्तस्त्राव होने से जब स्थिति खराब हो गई तो रिम्स भेज दिया गया. यूएसजी रिपोर्ट को ठीक से परखा नहीं गया.
सीएचओ संघ की प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि सदर अस्पताल में लगातार स्त्री एवं प्रसूति विभाग में लापरवाही की खबरें अक्सर मिलती रहती हैं. उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी कांके की एक एएनएम की मौत इसी तरह इलाज के दौरान हो गई थी.
इस बीच सदर अस्पताल के सिविल सार्जन डॉ प्रभात कुमार ने जांच में किसी लापरवाही से इंकार करते हुए मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की है.
दूसरी तरफ सीएचओ संघ से जुड़ी दर्जनों कर्मियों ने सदर अस्पताल पहुंच कर प्रतिमा कुमारी के इलाज से जुड़े सभी कागजात उपलब्ध कराने की मांग की. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया इलाज में कोताही हुई है. ऐसे में जो भी जांच कमेटी सिविल सर्जन बनाएं, उसमें सीएचओ संघ की ओर से भी एक सदस्य हो, ताकि जांच की विश्वसनीयता बनी रहे.
इस बीच सिविल सर्जन ने मीडिया को बताया कि सीएचओ की मौत से वह खुद मर्माहत हैं. उन्होंने कहा, “यूएसजी रिपोर्ट के अनुसार ‘प्लेसेंटा एकृता’ का पता चला था. लेकिन जब डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया तो मामला उससे भी आगे का यानी ‘प्लेसेंटा यूटरस के अंदर घुसा हुआ था और इसका एक्सटेंशन यूरिनरी ब्लाडर तक था, यह बहुत रेयर होता है. तीन-तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने सीएचओ की जान बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन जब मामला मल्टी ऑर्गन फेलियोर की ओर जाता दिखा, तो एसओपी के अनुसार रिम्स रेफर किया गया था. उन्होंने कहा कि फिर भी पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाई गई है.”
