लेह में बुधवार को हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को उनके गांव उलेटोक्पो से गिरफ़्तार कर लिया गया है.
पुलिस का आरोप है कि वांगचुक ने लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर अपनी भूख हड़ताल के दौरान दिए बयानों से भीड़ को भड़काया.
वांगचुक लद्दाख ने लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) के साथ मिलकर यह प्रदर्शन शुरू किया। भूख हड़ताल 10 सितंबर 2025 को शुरू हुई थी.
15 दिन बाद 24 सितंबर को उन्होंने इसे खत्म कर दिया. वजह बताई कि हिंसा बढ़ रही है, जिससे चिंता हो रही है.
हालांकि वांगचुक ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है. उन्होंने कहा कि उनके बयान सिर्फ मांगों को मजबूत करने के लिए थे.
बुधवार को गृह मंत्रालय ने एक बयान जारी किया था. इसमें वांगचुक को भड़काऊ भाषणों के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। मंत्रालय ने कहा कि वांगचुक ने अरब स्प्रिंग जैसे प्रदर्शनों और नेपाल में जेन Z के विरोध का जिक्र किया, जिससे भीड़ उकसाई गई.
हालांकि गृह मंत्रालय द्वारा उन्हें जिम्मेदार ठहराए जाने पर उन्होंने कहा था कि मुझे ‘बलि का बकरा’ बनाया जा रहा है.
वांगचुक ने कहा था कि ये कहना कि यह (हिंसा) मेरे द्वारा भड़काई गई थी, समस्या के मूल से निपटने के बजाय बलि का बकरा ढूंढ़ने जैसा है, और इससे कोई हल नहीं निकलेगा.
