रांचीः झारखंड में कुरमी को आदिवासी की सूची में शामिल करने की जोर पकड़ती मांग के बाद आदिवासी समुदाय ने भी मोर्चा खोल दिया है. आदिवासी समुदाय और संगठन जगह- जगह विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इस बीच आदिवासी बचाओ मोर्चा के लक्ष्मीनारायण सिंह मुंडा ने आजसू पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत को निशाने पर लिया है.
लक्ष्मी मुंडा ने अपने सोशल मीडिया के फेसबुकक अकाउंट पर एक पोस्ट साझा किया है और इस मुद्दे पर देवशरण भगत से जवाब चाहा है.
उन्होंने लिखा है, “आजसू पार्टी सुप्रीमो सुदेश कुमार महतो तो स्पष्ट तौर पर अपने कुड़मी/ कुरमी समाज की लड़ाई में खड़े हैं. जाहिर तौर पर यह आदिवासियों के अस्तित्व का सवाल है. हम आदिवासी लड़ कर मरें और आप विरोधियों का प्रवक्ता बन कर रहिए नही चलेगा. आदिवासी समाज आपकी तरफ देख रहा है देवशरण जी. हम लड़ें आखिरी दम तक और आप जैसे चेहरे बीजेपी-आजसू की गोद में खेलते रहें यह नही चलेगा.”

लक्ष्मी मुंडा ने कहा है, “इस आंदोलन को आजसू पार्टी का खुला समर्थन प्राप्त है. पार्टी अध्यक्ष सुदेश महतो ने इसे “समाज की जायज मांग” करार दिया है. जिसका आदिवासी संगठनों का विरोध है. कुड़मी/कुरमी जाति को ST कोटा में शामिल होने से मौजूदा 26 प्रतिशत आरक्षण प्रभावित होगा. यह आदिवासियों के अधिकारों पर अतिक्रमण है। यह ST कोटा खाने और आदिवासियों का नामो-निशान मिटाने की साजिश है. इसलिए आदिवासी समाज की ओर से मांग है कि आप ( देवशरण भगत) अपना स्टैंड स्पष्ट करें.”
आदिवासी समाज माफ नहीं करेगा
आदिवासी नेता मुंडा ने आगे लिखा है, कुड़मी/ कुरमी जाति समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे की मांग ने न केवल राज्य की आरक्षण व्यवस्था को चुनौती दी है ,बल्कि आदिवासी समाज के भीतर भी गहरे संकट की आशंका पैदा कर दी है. इस मामले में इस कुड़मी /कुरमी आंदोलन से जुड़े आजसू पार्टी के आदिवासी नेता और झारखंड आंदोलनकारी देवशरण भगत जी से सवाल है कि वे आदिवासी समाज के साथ हैं या नही हैं. आजसू पार्टी के सुप्रीमो सुदेश कुमार महतो ने लंबे समय से देवशरण भगत को” प्रवक्ता” बनाये रखा है. लेकिन आदिवासी समाज के व्यक्ति होने के नाते आपको आदिवासी समाज के साथ खड़ा होना चाहिए. अन्यथा “आदिवासी समाज माफ नही करेगा”.
गौरतलब है कि देवशरण भगत आजसू पार्टी मे प्रमुख आदिवासी चेहरा होने के साथ सुदेश महतो के सबसे करीबी माने जाते हैं. लेकिन अब आदिवासी समुदाय की ओर से उन्हें सवालों के घेरे में लेने से उनकी मुश्किलें बढ़ सकती है.

17 को आदिवासी बचाओ मोर्चा का जुटान
गौरतलब है कि कुड़मी समाज ने बीस सितंबर को राज्य में रेल टेका, डहर छेका आंदोलन किया था. इस आंदोलन को झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा और आजसू पार्टी के कुरमी नेताओ, कार्यकर्ताओं खुलकर साथ दिया था. सुदेश महतो समेत आजसू के कई नेता भी इस आंदोलन में शामिल हुए थे.
दूसरी तरफ आजसू से जुड़े कई आदिवासी चेहरे खुलकर आदिवासी समुदाय के आंदोलन में शामिल हो गए हैं. साथ ही इन बातों पर जोर देते रहे हैं कि पहले आदिवासी की बात होगी तब पार्टी की.
आदिवासी समुदाय और संगठनों ने बड़े दायरे के गोलबंदी के साथ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है. इससे पहले बीस सितंबर को रांची में जुलूस निकाला गया था. तथा राजभवन के साथ सभा की गई थी.
इसी सिलसिले में आदिवासी बचाओ मोर्चा का 17 अक्टूबर को प्रभात तारा मैदान में इस मुद्दे पर बड़ा जुटान होने वाला है. इससे पहले आदिवासी अस्तित्व बचाओ के द्वारा 12 अक्टूबर को रांची के मोराबादी मैदान में रैली बुलाई गई है.
