रांचीः तमाम अटकलों और कयासों के बीच झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा ने घाटशिला उपचुनाव लड़ने का खम ठोक दिया है.
चुनावी रणनीति और चर्चा को लेकर आज JLKM पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक धनबाद के तोपचांची में जयराम महतो की अगुवाई में हुई.
काफ़ी विचार विमर्श के बाद पार्टी ने घाटशिला उपचुनाव लड़ने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया है. जयराम महतो ने कहा है कि पार्टी मजबूती से चुनाव लड़ेगी. जल्द ही संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद प्रत्याशी की घोषणा कर दी जाएगी. हमारी सेना तैयार है.
जाहिर तौर पर अब घाटशिला में जेएमएम- बीजेपी के बीच झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा भी एक धुरी बनाने की कोशिश करेगा.
2024 के चुनाव में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के उम्मीदवार रामदास मुर्मू ने आठ हजार वोट लाकर यहां तीसरा स्थान हासिल किया था। जेएलकेएम के लिए यह पहला विधानसभा चुनाव था. आदिवासी इलाके में पार्टी
जबकि चुनाव जीते जेएमएम के रामदास सोरेन ने 98 हजार वोट लाए थे. दूसरे नंबर पर रहे बीजेपी के उम्मीदवार बाबूलाल सारेन को 75 हजार वोट मिले थे.
बाबूलाल सोरेन चंपाई सोरेन के पुत्र हैं और इस बार भी उनका चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है. उधर जेएमएम से रामदास सोरेन के पुत्र सोमेश चंद्र सोरेन चुनाव लड़ने के तैयारी मे जुटे हैं. इस बीच राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि उम्मीदवार के लेकर जेएमएम के सबसे बड़े दारोमदार, पार्टी के अध्यक्ष हेमंत सोरेन कोई और निर्णय ले सकते हैं. लेकिन उम्मीदवार जो भी हो वह रामदास सोरेन के परिवार से होगा, यह तय है.
अनूसचित जनजाति के लिए रिजर्व घाटशिला सीट कोल्हान रिजन में जमशेदपुर संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है. यहां वोटरों की संख्या 2 लाख 55 हजार 823 और मतदान केंद्रों की संख्या 300 है. चुनाव की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू कर दी गई है. सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक, झारखंड आंदोलनकारी और हेमंत सोरेन सरकार में शिक्षा मत्री रामदास सोरेन के निधन से यह सीट खाली हुई है. नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 20 अक्टूबर है।
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, चंपाई सोरेन, आदित्य प्रसाद साहू अमर बाउरी, भानू प्रताप शाही, जमशेदपुर के सांसद विद्युतवरण महतो सरीखे नेताओं ने वहां मोर्चा संभाल लिया है. जबकि सत्तारूढ़ जेएमएम अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को लामबंद करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता.
जयराम इस चुनाव में तीसरा कोण बनाने का प्रयास करेंगे. साथ ही किसका खेल बिगाड़ेंगे तथा पार्टी की चुनावी नैया को किस तरीके से पार लगायेंगे, यह देखना बाकी होगा. लेकिन घाटशिला में झारखंड मुक्ति मोर्चा की जमीन पहले से मजबूत रही है. जेएमएम अपनी जीत को लेकर विश्वास से लबरेज है.
वैसे भी 1990 से अब तक हुए नौ चुनावों में बीजेपी सिर्फ एक बार जीती है. बीजेपी के अंदरखाने यह कोशिश चल रही थी कि जयराम घाटशिला के उपचुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारें, ताकि कुरमी वोटों का समीकरण पार्टी साध सके. लेकिन सिर्फ कुरमी वोटों के सहारे जयराम के लिए भी चुनाव में मजबूत प्रदर्शन करना बेहद कठिन हो सकता है.
