रांचीः उम्मीदवार के नाम को लेकर तमाम अटकलों और कयासों के बीच झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा ने घाटशिला उपचुनाव में रामदास मुर्मू को अपना उम्मीदवार बनाया है.
शुक्रवार को सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा के उममीदवार सोमेश चंद्र सोरेन और भारतीय जनता पार्टी के बाबूलाल सोरेन ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है.
2024 में हुए विधानसभा चुनाव में भी रामदास सोरेन झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के टिकट से चुनाव लड़े थे, लेकिन महज आठ हजार वोटों पर सिमट गए थे. तब सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा के रामदास सोरेन को 98 हजार और बीजेपी के बाबूलाल सोरेन को लगभग 75 हजार वोट मिले थे.
रामदास सोरेन के निधन से यह सीट खाली हुई है. उपचुनाव में रामदास सोरेन के पुत्र सोमेश चंद्र सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार हैं और भारतीय जनता पार्टी ने चंपाई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन को एक बार पिर आजमा रही है.
तब पूछा जा सकता है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा और भारतीय जनता पार्टी के बीच टसल वाले इस उपचुनाव में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के उम्मीदवार की क्या हैसियत होगी और जयराम किसका खेल बनायेंगे अथवा किसका खेल बिगाड़ेंगे. इसलिए झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के खम ठोंके जाने के साथ ही बीजेपी और जेएमएम दोनों के कान खड़े हो गए हैं.

2024 में क्या हुआ था
2024 का चुनाव झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के लिए पहला चुनाव था. चुनाव में जेएलकेएम ने 71 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे. जीत तो अकेला जयराम की हुई, लेकिन लगभग साढ़े दस लाख वोट लाकर जयराम की पार्टी ने 2024 के चुनाव में बीजेपी और आजसू को अच्छी खासी चोट पहुंचा दी. चुनाव के 10 महीने बाद अब मोर्चा का संगठन भी खड़ा होता दिख रहा है और कार्यकर्तों, समर्थकों में तेवर भी भरने लगा है.
जाहिर तौर पर अब घाटशिला में जेएमएम- बीजेपी के बीच झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा भी एक धुरी बनाने की कोशिश करेगा.
जयराम के पास यहां खोने को कम पाने को अधिक है. अगर रामदास मुर्मू ने आठ हजार से अधिक वोट हासिल कर लिए तो, यह पता चलेगा कि पार्टी और उम्मीदवार दोनों की पैठ बढ़ने लगी है.
साथ ही घाटशिला में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा का लिटमस टेस्ट हो जाएगा कि आदिवासी इलाके में जयराम और उनकी पार्टी की सियासी हैसियत कितनी है. इसलिए कि आदिवासी इलाके में झारखंड मुक्ति मोर्चा गठबंधन ने पिछले चुनावों में दमदार प्रदर्शन किया है.
जेएमएम का गढ़
घाटशिला में झारखंड मुक्ति मोर्चा की जमीन पहले से मजबूत रही है. जेएमएम अपनी जीत को लेकर विश्वास से लबरेज है. रामदास सोरेन यहां से पहले तीन बार चुनाव जीते हैं. और 1990 से 2024 तक हुए नौ बार के चुनाव में बीजेपी सिर्फ एक बार जीती है. लेकिन बीजेपी इस बार मिथक तोड़ने की कोशिशों में जुटी है. आदिवासियों के लिए रिजर्व घाटशिला सीट में 2 लाख 55 हजार 823 वोटर उम्मीदवारों की किस्मत तय करेंगे.
बीजेपी के अंदरखाने यह कोशिश चल रही थी कि जयराम घाटशिला के उपचुनाव में उम्मीदवार नहीं उतारें, ताकि कुरमी-ओबीसी वोटों का समीकरण पार्टी साध सके. दरअसल कुरमी वोटों का खासकर युवाओं का रूझान जयराम के साथ दिखता रहा है. लेकिन सिर्फ कुरमी वोटों के सहारे जयराम के लिए भी चुनाव में मजबूत प्रदर्शन करना बेहद कठिन हो सकता है. दूसरा जो सबसे महत्वपूर्ण है- कुड़मी समाज के द्वारा आदिवासी की सूची में शामिल करने की मांग को लेकर पिछले बीस सितंबर को रेल टेका डहर छेका आंदोलन के बाद आदिवासी समुदाय ने जिस तरह से कुड़मियों की मांग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जगह- जगह जुलूस प्रदर्शन, सभा, रैलियां निकाली जा रही है. इधर कुड़मियों की मांग के समर्थन में जयराम और उनकी पार्टी भी खड़ी है। इसलिए आदिवासियों के निसाने पर जयराम भी हैं. इस विवाद को लेकर सोशल मीडिया पर भी दोनों खेमे में उबाल है. उस विवाद का घाटशिला के उपचुनाव में असर पड़ने से इनकार नहीं किया जा सकता. बहरहाल, अभी पानी का बहना बहुत बाकी है.
