रांचीः झारखंड में घाटशिला विधानसभा उपचुनाव को लेकर नामांकन दाखिल करने के दिन एक चलती स्कॉर्पियो की छत पर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के उम्मीदवार रामदास मुर्मू और पार्टी प्रमुख तथा डुमरी से विधायक जयराम कुमार महतो के बैठने और जुलूस निकालने के मामले में जारी नोटिस का जवाब पार्टी उम्मीदवार ने निर्वाचन पदाधिकारी को भेज दिया है.
इसके साथ ही सोशल मीडिया के अपने फेसबुक पेज पर रामदास मुर्मू ने एक वीडियो भी जारी किया है. इसमें वे कहते सुनाई पड़ रहे हैं कि जिस तरह से सोशल मीडिया और खबरों में इसे तूल दिया गया, विवाद बनाने की कोशिश की गई, वह जायज नहीं था. चुनावों के दौरान राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों को नोटिस मिलना सामान्य प्रक्रिया है.
आइए आपको पहले बताते हैं कि निर्वाचन पदाधिकारी को हाथ से और अंग्रेजी में लिखे जवाब में मुर्मू ने क्या कहा है.
उन्होंने कहा है, “नामांकन की तिथि 21 अक्टूबर को मैं और जेएलकेएम प्रमुख जयराम कुमार महतो स्कॉर्पियो वाहन की छत पर बैठे हुए बहुत कम समय के लिए लगभग 100 मीटर की दूरी पर निकले थे. क्योंकि पहले भी कई बार हमने देखा है कि अन्य सेंट्रल अथवा स्टेट पॉलिटिकल पार्टी के सुप्रीमो ने भी ऐसी गतिविधि की है. लेकिन अगली बार आपकी अनुमति या सूचना के बिना हमारी तरफ से ऐसी गतिविधि नहीं होगी. कृपया मुझे और मेरे पार्टी प्रमुख को क्षमा करें। हम आजीवन आपके आभारी रहेंगे.”
गौरतलब है कि 21 अक्टूबर को रामदास मुर्मू ने झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल किया है. उनका नामांकन दाखिल कराने पार्टी के प्रमुख जयराम कुमार महतो के साथ कई नेता, समर्थक भी पहुंचे थे.
मोर्चाबंदी में जुटे रणनीतिकार और दल
घाटशिला उपचुनाव में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा और प्रमुख विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के बीच टसल तय माना जा रहा है. झारखंड मुक्ति मोर्चा के लगभग डेढ़ दर्जन मंत्री, सांसद, विधायकों ने वहां पार्टी उम्मीदवार सोमेश चंद्र सोरेन के समर्थन में मोर्चा संभाला है. हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन का प्रचार अभी बाकी है.
उधर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन के समर्थन में उनके पिता और पूर्व मुख्य़मंत्री चंपाई सोरेन, जमशेदपुर से बीजेपी के सांसद विद्युत वरण महतो समेत कोल्हान के कई नेता चुनावी नैया खेने में जुटे हैं. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी की भी यहां सीधी नजर है और वे घाटशिला का कई फेरे लगा चुके हैं. बीजेपी ने 40 स्टार प्रचारकों की सूची जारी की है.

जेएलकेएम की क्या होगी हैसियत
दो मजबूत धड़े सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा और भारतीय जनता पार्टी के बीच होने वाले इस घमासान में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के कार्यकर्ता, समर्थक भी एक मजबूत धुरी बनाने की कोशिशों में जुटे हैं. साधन- संसाधन में कम पड़ने के बाद भी झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के उम्मीदवार, कार्यकर्ता, समर्थक हवा बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते. जयराम कुमार महतो की रणनीति में यह शामिल है कि 2024 के विधानसभा चुनाव से ज्यादा वोट हासिल किए जा सकें, ताकि पार्टी की हिम्मत और हैसियत दोनों आंकी जा सकी. 2024 के चुनाव में रामदास मुर्मू को आठ हजार 92 वोट मिले थे.
पार्टी की अगली कतार में शामिल और जयराम कुमार महतो के भरोसेमंद रणनीतिकार मोतीलाल महतो ने वहां कैंप कर रखा है. देवेंद्रनाथ महतो, दयमंती मुंडा, पूजा महतो, प्रेम मार्डी, नवीन महतो समेत अन्य कई प्रमुख नेताओं की भी जिम्मेदारी तय कर दी गयी है. रामदास मुर्मू भी जनसंपर्क में भिड़े हैं.
जयराम खुद वहां मोर्चा संभालने की तैयारी में हैं. जाहिर तौर पर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों की नजरें जेएलकेएम के प्रदर्शन पर टिकी है कि जयराम के उम्मीदवार किस दल के उम्मीदवार का सेंध लगायेंगे. वैसे जयराम ने नामांकन के बाद हुई सभा में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा और भरतीय जनता पार्टी दोनों को निशाने पर लेते हुए संकेत दे दिए थे कि वे इस चुनाव में यह बतायेंगे कि झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा रणछोड़ नहीं है.
घाटशिला में 11 नवंबर को वोट है. 14 को बिहार विधानसभा चुनाव के साथ नतीजे आएंगे. उपचुनाव के लिए अब 14 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनकी किस्मत का फैसला 2 लाख 53 हजार 823 वोटर करेंगे. छठ महापर्व के बाद घाटशिला में प्रचार का युद्ध जोर पकड़ेगा. अभी मोर्चाबंदी और चौहद्दी नापने में सब जुटे हैं.
क्यों टिकी है नजरें
इस उपचुनाव पर पूरे राज्य की नजरें इस वास्ते भी टिकी है कि कुरमियों के द्वारा आदिवासी की सूची में शामिल करने की मांग को लेकर पिछले सितंबर महीने में किए गए रेल टेका डहर छेका आंदोलन के बाद आदिवासी समुदायों ने कुरमियों की मांग के खिलाफ जिस तरह से मोर्चा खोला है और उनके निशाने पर जयराम भी रहे हैं, उसका असर क्या होता है और समीकरणों को यह विवाद किस हद तक बनाता- बिगाड़ता है यह देखा जाना है. वह इसलिए भी कि सामाजिक तानाबाना से जुड़े इस विवाद को घाटशिला उपचुनाव के मद्देनजर हवा देने की कोशिशें चल रही है.
वैसे मुमकिन है कि कोई दल अथवा चुनावी मोर्चा संभाल रहे नेता चुनाव प्रचार के दौरान इस मुद्दे पर हाथ नहीं डालेंगे. भीतर- भीतर चालें जरूर चली जा सकती हैं.
हालांकि जयराम कुमार महतो, देवेंद्र नाथ महतो सरीखे नेता आदिवासियों के सवालों, मुद्दों पर भी लगातार सघर्ष करते रहे हैं. अलबत्ता जयराम सदन में भी आदिवासी हितों की बात कई मैके पर करते रहे हैं. नगड़ी में आदिवासियों की जमीन बचाने के लिए हुए आंदोलन में भी देवेंद्र नाथ महतो तथा जयराम महतो शामिल थे.
पिछले दिनों जेएलकेएम के कोल्हान प्रभारी नवीन महतो ने आदित्यपुर में मीडिया से बात करते हुए कहा भी था कि मौजूदा समय में लड़ाई संरक्षण की है, जबकि झगड़ा को दूसरी तरफ मोड़ा जा रहा है. जबकि झारखंड के गठन में आदिवासी और कुड़मी दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. बावजूद इसके आज केंद्रीय अध्यक्ष जयराम महतो को टारगेट किया जा रहा है.
