रांचीः झारखंड के पुलिस महानिदेशक अनुराग गुप्ता के इस्तीफे की खबर सुबह से ही चर्चा में है, लेकिन अब तक आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है.
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक आखिरकार, अपनी सेवानिवृत्ति के सात महीने बाद, डीजीपी अनुराग गुप्ता ने मंगलवार को कथित तौर पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया. हालाँकि अभी आधिकारिक तौर पर इसकी घोषणा नहीं हुई है, लेकिन झारखंड पुलिस मुख्यालय के सूत्रों ने उनके इस्तीफे की पुष्टि की है.
सूत्रों ने यह भी संकेत दिया है कि उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है.
इधर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारे में भी बुधवार को दिन भर उनके इस्तीफे के लेकर अटकलों का दौर जारी रहा. अलबत्ता भाजपा के कई नेताओं की प्रतिक्रियाएं सुनी जा रही हैं.
एक चर्चा यह भी है कि मंगलवार की शाम पुलिस मुख्यालय स्थित उनके कार्यालय के बंद होने के बाद रात करीब साढ़े सात बजे अनुराग गुप्ता कार्यालय पहुंचे. इसके बाद वह कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास पहुंचे. कुछ देर के बाद वहां से घर लौट गए.
अनुराग गुप्ता 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और उन्हें 26 जुलाई 2024 को प्रभारी डीजीपी नियुक्त किया गया था, जिसके बाद उन्हें फरवरी 2025 में नियमित डीजीपी बनाया गया था. उनका कार्यकाल फरवरी 2027 तक था. सरकार ने एसीबी और सीआईडी डीजी का प्रभार भी उन्हें ही दे रखा था. सितंबर माह में सरकार ने एसीबी को एसीबी का प्रभार वापस ले लिया.
उल्लेखनीय है अनुराग गुप्ता को वर्ष 2022 में पुलिस महानिदेशक (डीजी) के रैंक में प्रोन्नति मिली थी. प्रोमोशन के बाद अनुराग गुप्ता डीजी ट्रेनिंग बनाये गये थे.
इससे पहले, गुप्ता ने 26 जुलाई, 2024 को झारखंड के प्रभारी डीजीपी का पदभार ग्रहण किया था, लेकिन झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान भारत निर्वाचन आयोग ने उन्हें पद से हटा दिया था. चुनाव के बाद, हेमंत सोरेन सरकार के प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में लौटने पर, उन्हें 28 नवंबर, 2024 को प्रभारी डीजीपी के पद पर पुनः नियुक्त किया गया था.
अनुराग गुप्ता को डीजीपी नियुक्त किये जाने के साथ कहा गया था कि उनका कार्यकाल झारखंड के पुलिस महानिदेशक एवं महानिरीक्षक (पुलिस बल प्रमुख) के चयन एवं नियुक्ति नियम 2025 के नियम 10(1) के अनुसार होगा. हालाँकि, केंद्र सरकार के अनुसार, वे आधिकारिक तौर पर 30 अप्रैल, 2025 को सेवानिवृत्त होंगे.
इस बीच, झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने एक जनहित याचिका दायर कर अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को असंवैधानिक और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन बताया.
लेकिन सुप्रीम कोर्ट की तरफ से उनकी याचिका खारिज कर दी गयी थी.
