रांचीः झारखंड में घाटशिला विधानसभा उपचुनाव को लेकर रविवार की शाम प्रचार का शोर खत्म होने के साथ ही उम्मीदवार और दलों के रणनीतिकार बूथ मैनेजमेंट के रण कौशल में जुटे हैं.
11 नवंबर को होने वाले उपचुनाव में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार सोमेश चंद्र सोरेन और बीजेपी के बाबूलाल सोरेन के बीच है.
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के उम्मीदवार रामदास मुर्मू और उनके चुनावी खेवनहार जयराम कुमार महतो ने तीसरा कोण बनाने के लिए जमकर पसीना बहाया है.
2 लाख 55 हजार 823 वोटर 13 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे. यहां मतदान केंद्रों की संख्या 300 है. शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव के लिए प्रशासन ने विभिन्न स्तरों पर इंतजाम पक्का कर लिया है.
जेएमएम के विधायक और हेमंत सोरेन सरकार मे शिक्षा मंत्री रहे रामदास सोरेन के निधन से यहां उपचुनाव हो रहा है.
रामदास सोरेन के पुत्र सोमेश को पार्टी ने मैदान में उतारा है. बीजेपी के उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन पूर्व मुख्यमंत्री और सरायकेला से बीजेपी के उम्मीदवार चंपाई सोरेन के पुत्र हैं.
2019 के चुनाव में बाबूलाल सोरेन रामदास सोरेन से लगभग 23 हजार वोटों से हार गए थे. इस बार चंपाई सोरेन अपने पुत्र की जीत के लिए आधिरी वक्त तक जोर लगाये दिखते रहे. उन्होंने एक-एक गांव को नापा. वोटों के समीकरण जोड़ने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है. बीजेपी के प्रदेश स्तर के नेताओं की एक टीम भी लगातार वहां कैप करती रही.
जबकि हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने सोमेश के समर्थन में मोर्चा संभाले रखा. इनके अलावा जेएमएम के कम से कम चालीस नेता, जिनमें मंत्री. सांसद, विधायक, पूर्व विधायक शामिल थे, घाटशिला में प्रचार के आधिरी दिन तक जमे रहे. रविवार को ही हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने रोड शो कर चुनावी हवा का रुख जेएमएम की तरफ मोड़ने का भरसक प्रयास किया और दावे किए कि घाटशिला में जेएमएम का ही परचम लहरेगा.
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के नेताओं ने भी प्रचार मे जमकर मेहनत की. मोर्चा ने गांव- गांव में नुक्कड़ सभा और पदयात्रा पर जोर दिया.
सियासी दांव-पेच और इमोशन कार्ड
प्रचार के दौरान नेताओं के बीच जुबानी जंग छिड़ी रही. आरोप- प्रत्यारोप का दौर रहा. बीजेपी के की नेता जेएमएम में शामिल हुए, तो बीजेपी ने भी जेएमएम के कई नेताओं को अपने पाले में किया.
चुनाव से ठीक एक दिन पहले, सोमवार को झामुमो महिला मोर्चा की घाटशिला नगर अध्यक्ष लिली भगत और उनके समर्थक बीजेपी में शामिल हो गएं. चंपाई सोरेन ने सोशल मीडिया के अपने अकाउंट एक्स पर यह जानकारी देते हुए लिखा, ‘घाटशिला से रूझान आने शुरू हो गये.’
इससे पहले प्रचार के दौरान इमोशन कार्ड भी खूब चले गये. आठ नवंबर को कल्पना सोरेन की एक सभा में सोमेश सोरेन की मां सूरजमणि मुर्मू भाषण के दौरान फूट कर रो पड़ीं. कल्पना सोरेन ने उनकी आंखों के आंसू पोंछे. सूरजमणि ने बेटे को जिताने की अपील की. कल्पना सोरेन ने भी भाषण के दौरान कई दफा रामदास सोरेन की खूबियों का बकान करते हुए लोगों से सोमेश को समर्थन देने की भावुक अपील करती दिखीं.
इधर नौ नवंबर को एक प्रेस कांफ्रेंस में चंपाई सोरेन भावुक दिखे और फफक कर रो पड़े. वे हेमंत सोरेन के एक बयान से आहत थे. उन्होंने कहा, “मुझे मेरे ही नेता ने बैल कहा, जेएमएम ने मेरे साथ विश्वासघात किया, मुझे अपमानित किया”.
भाजपा नेता चंपाई सोरेन ने कहा कि गुरुजी शिबू सोरेन के साथ मिलकर उन्होंने अलग राज्य के लिए आंदोलन किया था और अलग राज्य बनाया, लेकिन उन्हें सभा के बीच अपमानित किया गया है. उन्होंने कहा कि इतनी संकीर्ण मानसिकता किसी झारखंड के नेता को नहीं रखनी चाहिए.
