दिल्ली की एक अदालत ने नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है, जिसमें कथित तौर पर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी शामिल हैं.
राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा मनी लॉन्डरिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दायर शिकायत संज्ञान लेने योग्य नहीं है, क्योंकि यह मामला एक निजी शिकायत पर आधारित है. इसमें कोई एफआईआर नहीं है.
अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा, “धारा 3 के तहत परिभाषित और धारा 4 के तहत दंडनीय मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध से संबंधित जांच और उसके परिणामस्वरूप अभियोग शिकायत एफआईआर या अधिनियम की अनुसूची में उल्लिखित अपराध के अभाव में सुनवाई योग्य नहीं है.” इसके साथ ही अदालत ने गांधी परिवार के खिलाफ ईडी की शिकायत खारिज कर दी.
अदालत ने यह भी राय दी कि चूंकि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने अब इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है, इसलिए ईडी द्वारा आरोपों की मेरिट पर किए गए दावों पर फैसला करना समयपूर्व और अनुचित होगा.
कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंहवी ने नेशनल हेराल्ड मामले पर कहा, “जब मैंने इस मामले की पैरवी शुरू की… तो मैंने अदालत से कहा था कि यह एक बहुत ही अजीब मामला है, जहां पैसों का एक पाई भी लेन-देन नहीं हुआ है, अचल संपत्ति का एक मिलीमीटर भी लेन-देन नहीं हुआ है. सारी संपत्तियां एजेएल के पास ही हैं और मनी लॉन्ड्रिंग हो रही है… एजेएल का 90 प्रतिशत हिस्सा अब यंग इंडिया नामक एक अन्य कंपनी के पास है – बस यही हुआ है। यह मामला संज्ञान लेने लायक नहीं है और यहां आप देख सकते हैं कि भाजपा ने कितना हंगामा खड़ा कर दिया है… उन्होंने अतिशयोक्ति का ढांचा बना दिया है.”
