रांचीः झारखंड सरकार ने अनूसचित क्षेत्रों (शिड्यूल एरिया) के लिए पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली लागू कर दिया है. नियामवली में ग्रामसभा को सशक्त करने के लिए कई अधिकार दिए गए हैं. साथ ही वनोपज, लघु खनिज जैसे संसाधनों पर ग्रामसभा का नियंत्रण होगा.
झारखंड में पेसा कानून लागू करने की मांग वर्षों पुरानी रही है. पिछले 23 दिसंबर को कैबिनेट ने इस नियमावली को मंजूरी प्रदान की थी. जाहिर तौर पर अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को एवं जनजातीय समुदायों को अधिक अधिकार और स्वायत्तता मिलने का रास्ता साफ हुआ है.
इस कानून के लागू होने से ग्राम सभाएं अब पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली होंगी. नए नियमों के तहत ग्राम सभा को अपने क्षेत्र में खनन अधिकार, भूमि अधिग्रहण और वन भूमि से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय लेने का वैधानिक अधिकार प्राप्त होगा.
पेसा नियामवली को लेकर सरसरी निगाह से जानिए वो सभी जरूरी तथ्य, जो आपके लिए जरूरी है.
इन 16 जिलों में लागू होगा पेसा
राज्य के 16 जिलों में पेसा लागू होगा. इनमें 13 जिले- रांची खूंटी लोहरदगा गुमला सिमडेगा लातेहार पूर्वी शंभूम पश्चिम सिंहभूम सरायकेला खरसावां दुमका जामताड़ा साहिबगंज और पाकुड़ में पूर्णतया और पलामू गोड्डा गढ़वा ये तीन जिले में आंशिक रूप से यह लागू होगा.
ये हो सकेंगे ग्रामसभा के अध्यक्ष
संताल समुदाय- मांझी, परगना
हो समुदाय- मुंडा, मानकी, दिउरी
खड़िया समुदाय- डोकलो, सोहोर
मुंडा समुदायः हातू मुंडा, पड़हा राजा, पाहन
उरांव समुदायः महतो, पड़हा बेल( राजा) पहान
भूमिजः मुंडा, सरदार , नाया, डाकुआ (या इस प्रकार के विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित किसी अन्य नाम से अध्यक्ष के रूप में जाना जाता है.)
लघु खनिज, वनोपज पर सीधा नियंत्रण
पेसा नियामवली में प्राकृतिक और सामुदायिक संसाधनों पर ग्राम सभा के अधिकारों को स्पष्ट किया गया है. ग्रामसभा अपने पारंपरिक क्षेत्र के भीतर स्थित जल निकायों (तालाब, झरना, नहर आदि) और लघु खनिजों का प्रबंधन अपनी रूढ़िवादी प्रथाओं के अनुसार कर सकेगी. लघु वनोपज भी ग्रामसभा के नियंत्रण में होंगे. इनके अलावा लघु वनोपज- महुआ, शहद, बांस और औषधीय पौधो पर ग्रामसभा का सीधा नियंत्रण होगा.

बालू घाट कौन चलाएगा
केटेगरी-1 (पांच हेक्टेयर से कम) के बालूघाट का संचालन ग्रामसभा करेगी. यहां जेसीबी से खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा. साथ ही एनजीटी के निर्देश के अनुरूप मानूसन में बालू का उठाव पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. बालू से प्राप्त शुल्क ग्राम सभा के कोष में जाएगा.
सीएनटी जमीन ट्रांसफर में क्या बदलेगा
छोटानागपुर काश्तकारी और संतालपरगना काश्तकारी एक्ट से जुड़े मामलों में ग्राम सभा की सहमति जरूरी होगी. अगर आदिवासी जमीन पर सीएनटी की धारा 71 का उल्लंघन कर कोई कब्जा कर लेता है तो या कपटपूर्ण तरीके से हासिल कर लेता है, तो ग्राम सभा उसे जमीन से बेदलखल कर सकेगी. इसके बदले कब्जाधारी को किसी तरह का मुआवजा नहीं मिलेगा. हर साल 15 अप्रैल तक रजिस्टर टू की कॉपी ग्राम सभा को उपलब्ध करानी होगी.

शराब पर क्या होगा अधिकार
ग्राम सभा की अनुमति के बिना कोई शराब की दुकान नहीं खुलेगी. बिना अनुमति फैक्ट्री भी उस इलाके में नहीं बैठायी जा सकेगी. हालांकि महुआ, हड़िया जैसी पारंपरिक पेय घरेलू और सामाजिक उपयोग के लिए होगा. शराब नियंत्रण में महिलाओं की भूमिका निर्णायक होगी.
सर्वोच्च इकाई बनी ग्राम सभा
पंचायती राज विभाग की ओर से अधिसूचित नई नियमावली में ग्राम सभा को शासन की सबसे मजबूत और सर्वोच्च इकाई के रूप में स्थापित किया गया है. अब प्रत्येक पारंपरिक ग्राम सभा की बैठक महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से होगी. बैठक के लिए एक तिहाई कोरम की जरूरत होगी. बैठक खुली जगह पर सार्वजनिक रूप से करनी होगी.
बैठक की अध्यक्षता गांव की परंपरा के अनुसार मांझी, मुंडा, पाहन जैसे पारंपरिक ग्राम प्रधान या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य द्वारा की जाएगी.
बैठक के लिए एक-तिहाई उपस्थित अनिवार्य है, जिसमें कम से कम एक-तिहाई महिलाएं होंगी. इससे महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को भी मजबूती मिलेगी.
साथ ही ग्राम सभा को अपने क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाने तथा विवाद सुलझाने का अधिकार होगा.
पुलिस को देनी होगी एफआईआऱ की जानकारी
पेसा नियमावली 2025 ग्राम सभा को सामाजिक न्याय और शांति व्यवस्था के क्षेत्र में भी सशक्त बनाएगी. ग्राम सभा अपने क्षेत्र में परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार विवादों का निपटारा कर सकेगी. पुलिस को किसी भी दर्ज प्राथमिकी की जानकारी सात दिनों के अंदर ग्राम सभा को देनी होगी.
भूमि विवाद, पारिवारिक मामले और छोटे-मोटे आपराधिक प्रकरणों की सुनवाई ग्राम सभा कर सकेगी. वह अधिकतम दो हजार रुपये तक का आर्थिक दंड लगा सकती है, हालांकि इसके खिलाफ अपील का प्रावधान भी किया गया है. अगर कोई आरोपी अपनी भूल स्वीकार कर क्षमा मांगता है और दोबारा गलती नही करने का प्रण लेता है तो उसे ही दंड मान लिया जाएगा.
सामाजिक बुराइयों से निपटेगी ग्राम सभा
नियमावली में अंध विस्वास, जदू-टोना और डायन-बिसाही जैसी कुरितियों के खिलाफ ग्राम सभा को कड़े कदम उठाने और जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है.
डीसी की भूमिका क्या होगी
डीसी के स्तर से गठित बहु-अनुशासनात्मक टीम (मल्टी-डिसिप्लिनरी- टीम एमडीटी) ग्राम सभा से परामर्श कर वार्षिक विकास योजना तैयार करेगी. ग्राम सभा को इन योजनाओं पर 30 दिनों के भीतर निर्णय लेने का अधिकार होगा.
यदि तय समय में निर्णय नहीं हुआ, तो योजना को स्वतः स्वीकृत माना जाएगा. खास बात यह है कि ग्राम सभा को योजनाओं में संशोधन, शर्तें जोड़ने या बदलाव करने का भी पूरा अधिकार दिया गया है.
अब सरकारी विभाग या पंचायतें गांव में कोई भी योजना लागू करने से पहले ग्राम सभा की अनुमति लेने के लिए बाध्य होगी.
पारंपरिक ग्राम, ग्राम सभाओं तथा उनकी सीमाओं की मान्यता और प्रकाशन की जिम्मेदारी उपायुक्त की होगी. उपायुक्त प्रखंड स्तर पर टीम का गठन करेंगे. प्रत्येक राजस्व ग्राम को एक ग्राम सभा का अधिकार होगा.
जल-जंगल-जमीन पर ग्राम सभा अधिकार
इस नियमावली का सबसे बड़ा असर क्षेत्र के सामुदायिक संसाधनों के प्रबंधन पर पड़ेगा. जल, जंगल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों की देखरेख और उपयोग का अधिकार अब ग्राम सभा के पास होगा,.
इसके लिए “ग्राम सभा कोष” की स्थापना की जाएगी, जिसमें चार प्रकार के कोष होंगे—अन्न कोष, श्रम कोष, वस्तु कोष और नगद कोष.
इस कोष में लघु वनोपज से प्राप्त रॉयल्टी, दंड राशि और अन्य राजस्व जमा किए जाएंगे.
