झारखंड के मुख्यमंत्री और जेएमएम के सबसे बड़े दारोदार हेमंत सोरेन ने पहले दुमका और फिर धनबाद में आयोजित पार्टी के स्थापना दिवस समारोह में एक साथ कई तीर साधे. यूं कहें अपने भाषणों में वे दूर की कौड़ी खेलते रहे.
दुमका और धनबाद में पार्टी के स्थापना दिवस समारोह में कार्यकर्ताओं और समर्थकों का हुजूम उमड़ा. दिशोम गुरुजी शिबू सोरेन की कमी भी खली. दुमका के कार्यक्रम में गुरुजी को याद करते हुए हेमंत सोरेन भावुक हो गए. उनकी आंखों में सू छलक पड़े. वहीं धनबाद में मंच पर शिबू सोरेन के लिए कुर्सी खाली छोड़ी गई. कुर्सी पर उनकी तस्वीर रखी थी.
शिबू सोरेन को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ समर्थन में नारे भी आसमान में गूंजते रहे.
इन कार्यक्रमों में हेमंत सोरेन ने बीजेपी और केंद्र की सरकार पर भी हमला बोला. कार्यकर्ताओं और समर्थकों में यह कहते हुए जोश भरे कि विरोधियों को किसी हाल में झारखंड की सत्ता में काबिज नहीं होने देना है.
हेमंत सोरेन ने बार- बार शिबू सोरेन के संघर्ष की चर्चा की. उन्होंने कहा कि गुरुजी के बताए मार्ग पर चलेंगे तो देर ही सही, मंजिल जरूर मिलेगी. उन्होंने यह भी कहा कि अब गैर झारखंडी भी खुद को झारखंडी कहने में गर्व महसूस करते हैं.
हेमंत सोरेन को बखूबी पता है कि गुरुजी का नाम कार्यकर्ताओं, समर्थकों में जोश भरने के लिए काफी है. हेमंत रूह से अपने बाबा को याद इसलिए भी करते हैं कि शिबू की रखी नींव पर ही उन्हें राजनीतिक ऊंची दीवार खड़ी करनी है.
गांव भी हमारा, शहर भी हमारा
मुख्यमंत्री ने झामुमो कार्यकर्ताओं से निकाय चुनाव में पूरी ताकत से उतरने की अपील की. उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में पार्टी को मजबूत करना जरूरी है. विरोधियों को जहां मौका मिलेगा, वहीं चोरी करेंगे. इसलिए कहीं से भी उन्हें जीतने का अवसर नहीं मिलना चाहिए.
जाहिर तौर पर हेमंत सोरेन की सीधी नजर अब शहरी इलाके में पैठ बढ़ाने पर है. हेमंत बखूबी जानते-परखते हैं कि अगर शहरी इलाके में बीजेपी को और पीछे धकेला जाए, तो झारखंड मुक्ति मोर्चा आगे अपने दम पर सरकार बनाने के लिए सक्षम होगा.
बुधवार को धनबाद के गोल्फ ग्राउंड में आयोजित झामुमो के 54वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री ने करीब 52 मिनट तक भाषण दिया. उन्होंने कहा कि जब तक केंद्र में भाजपा की सरकार है, तब तक देश में महंगाई कम नहीं होने वाली है.
हेमंत सोरेन ने कहा कि महंगाई के कारण गरीब परिवार अपने बच्चों को पढ़ा नहीं पा रहे हैं. इसे देखते हुए झारखंड सरकार महिलाओं को हर माह ढाई हजार रुपये की सहायता दे रही है. सरकार हर वर्ग का ख्याल रख रही है. उन्होंने लोगों से कहा कि बच्चों को खूब पढ़ाएं और गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ लेकर उन्हें डॉक्टर, इंजीनियर, वकील और पत्रकार बनाएं.
झारखंडी अब बोका नहीं
कार्यकर्ताओं और समर्थकों की नब्ज पर भी उन्होंने हाथ रखने की कोशिशें की. हेमंत सोरेन ने कहा, “पहले सामंतवादी ताकतें कहा करती थीं कि झारखंड नहीं बनना चाहिए. जब राज्य बना, तो कहा गया कि आदिवासी और झारखंडी शासन नहीं चला सकते. झारखंड विरोधियों को सत्ता से बाहर किया गया और अब राज्य के लोग शासन चलाना जानते हैं. झारखंड के लोग बोका नहीं रह सकते.”
आउट सोर्सिंग कंपनियों के बहाने
धनबाद के कार्यक्रम में हेमंत सोरेन ने कोयला क्षेत्र में स्थानीय लोगों को रोजगार के सवाल पर भी चतुराई से हमला बोला. उन्होंने कहा कि अगर कोयला क्षेत्र में काम कर रहीं आउटसोर्सिंग कंपनियां 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं देती हैं, तो स्थानीय लोग उन पर कब्जा करें. सरकार इस पूरे मामले को देख रही है और न्याय की लड़ाई में जनता के साथ खड़ी है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि धनबाद कोयला क्षेत्र है, लेकिन यहां की कोयला कंपनियों ने खनन का काम आउटसोर्सिंग कंपनियों को सौंप दिया है. ये कंपनियां बाहरी मजदूरों को लाकर काम करा रही हैं, ताकि वे अपने अधिकारों की मांग न कर सकें. स्थानीय लोगों को जानबूझकर रोजगार से दूर रखा जा रहा है, क्योंकि कंपनियों को डर है कि लोकल लोग आंदोलन करेंगे.
दुमका और धनबाद दोनों जगहों पर हेमंत सोरेन आदिवासी सवालों पर भी मुखर रहे. अपने असम दौरे की चर्चा की. आदिवासियों के आंदोलन की बात की. यह भी कहा कि सरकार आदिवासी, मूलवासी के दम पर बनी है, तो हम उन्हें हर पल साथ लेकर चलेंगे. मतलब हेमंत सोरेन ने इन रैलियों के जरिए सरकार के कामकाज गिनाने की कोशिशों के साथ अपने इरादे बताये और इसका भी अहसास कराया कि अभी झारखंड में सत्ता का सिरमौर वही रहेंगे.
