कोडरमाः झारखंड में कोडरमा की पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष शालिनी गुप्ता औपचारिक तौर पर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा में शामिल हो गईं.
मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष हेमंत सोरेन के समक्ष अपने हजारों कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ अपने नये सियासी सफर की शुरुआत की. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अब हेमंत सोरेन के नेतृत्व में अब कोडरमा की राजनीति बदलने वाली है.
कोडरमा के लुकाईटांड में आयोजित इस कार्यक्रम की तैयारी कई दिनों से चल रही थी. इससे पहले 27 फरवरी को कोडरमा के सुहाना गार्डेन में आयोजित समर्थक मिलन समारोह में शालिनी गुप्ता ने अपने लोगों के साथ रायशुमारी में यह निर्णय लिया था. इस कार्यक्रम में सरकार के मंत्री और जेएमएम के वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार ने भी शिरकत की थी. और लुकाईटांड़ में भी सुदिव्य सोनू कोडरमा में मौजूद रहे. शालिनी के जेएमएम में शामिल कराने के सूत्रधार भी सुदिव्य को माना जाता है.
जाहिर तौर पर शालिनी के इस नये सियासी सफर के राजनीतिक मायने हैं. यूं कहें कि हेमंत सोरेन ने केंद्रीय मंत्री बीजेपी की नेता अन्नपूर्णा देवी और विधायक नीरा यादव के गढ़ में सेंध लगाने का नया दांव चल दिया है. हेमंत सोरेन कोडरमा, गिरिडीह, हजारीबाग सरीखे इलाके में जेएमएम का दबदबा बढ़ाना चाहते हैं.
हेमंत की सीधी नजर 2029 पर
दरअसल, आदिवासी इलाके में वे सर्वमान्य नेता के तौर पर उभरे हैं और बीजेपी की हालत पस्त कर दी है. हेमंत सोरेन और उनके नजीदीकी रणनीतिकारों की नजर अब दूर तक देख रही है. और वह है 2029 का लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव. झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास 34 विधायक हैं. दो बार से हेमंत सोरेन सत्ता पर काबिज हैं. जाहिर तौर पर हेमंत अभी से ही अकेले दम पर सरकार बनाने के लिए गोटियां बिछाने में लगे हैं.
कोडरमा की सभा में हेमंत सोरेन ने शालिनी को प्रभावी नेता बताया. उन्होंने अपनी सरकार के कामकाज की चर्चा की. भाजपा और केंद्र सरकार दोनों को चेताया भी. भीड़ से जेएमएम और हेमंत के समर्थन में नारे लगे.

शालिनी का नया सफर
अब बात करते हैं कि कौन हैं शालिनी गुप्ता. उनके जेएमएम में शामिल होने के बाद क्या कुच बदलेगा. शालिनी गुप्ता को कोडरमा की राजनीति में एक तेज- तर्रार नेता के तौर पर देखा जाता है.
2019 में बीजेपी से टिकट नहीं मिलने पर वे आजसू पार्टी में शामिल हो गई थीं. तब उन्हें लगभग 42 हजार वोट मिले थे. चुनाव के तुरंत बाद उन्होंने आजसू से राह अलग कर ली. 2024 में वे निर्दलीय चुनाव लड़ीं. उन्हें लगभग 70 हजार वोट मिले. वे तीसरे नबंर पर रहीं, लेकिन समीकरणों पर गैर करें, तो वे चुनावी मैदान में भाजपा की नीरा यादव और दूसरे नंबर पर रहे राजद उम्मीदवार को परेशान किए रखा. यानी दस सालों से शालिनी अपने बूते कोडरमा की राजनीति और चुनाव में दमखम दिखाती रही हैं.
अन्नपूर्णा- नीरा का दबदबा
डरमा विधानसभा सीट से बीजेपी की नीरा यादव 2014 से लगातार चुनाव जीतती रही हैं. 2014 में वे रघुवर दास की सरकार में मंत्री भी रहीं.
उधर कोडरमा से लगातार 2014 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अन्नपूर्णा देवी राजद छोड़कर बीजेपी में शामिल हुई थीं.
बीजेपी ने उन्हें चुनाव लड़ाया. वे जीत गईं. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी अन्नपूर्णा देवी की शानदार जीत हुई. उनका कद बढ़ा. अभी वे केंद्र में महिला बाल कल्याण मंत्री हैं. इससे पहले वे राजद से चार बार कोडरमा की विधायक रहीं हैं.
यानी कोडरमा की सियासत इन तीन प्रमुख महिला चेहरे के इर्द- गिर्द घूमती रही है. अब शालिनी के जेएमएम में शामिल होने से नये समीकरणों के बनने- बिगड़ने से इंकार नहीं किए जा सकते.
