बोकारो: झारखंड के बोकरो जिले के महुआटांड़ में जंगलों- पहाड़ों से घिरे गांवों में हाथियों के हमले के बाद दहशत है. शनिवार को एक बार फिर हाथियों के झुंड ने महुआटांड़ थाना क्षेत्र के गंगपुर गांव में कहर बरपाया है. हाथियों के हमले में एक ही परिवार के दो लोगों की मौत हो गई है. इसी परिवार के तीन बच्चे सहित चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं.
इस इलाके में दो दिनों में हाथियों ने पांच लोगों को कुलचकर मार डाला है. इससे पहले महुआटांड़ थाना क्षेत्र के बड़कीपुन्नू के करमाली टोला में बुधवार की देर रात एक ही परिवार के तीन बुजुर्गों को कुचलकर मार डाला था.
शनिवार को गंगपुर गांव में हाथियों ने सोमर साव के घर पर हमला कर दिया. इस दौरान घर मे मौजूद सभी लोग छत पर जाने के लिए भागे, लेकिन हाथियों ने सोमर साव और उनके तीन साल के पोते अमन साव को मार डाला. हाथियों के हमले में सोमर साव के घर के तीन बच्चे सहित चारलोग घायल घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए रामगढ़ सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
बोकारो के डीएफओ संदीप शिंदे ने हाथी हमले में दो लोगों की मौत की पुष्टि की है. उन्होंने बताया है कि क्यूआर टीम हाथियों को भगाने के लिए काम कर रही है. हमने रामगढ़ और बंगाल से भी हाथी भगाने वाली एक्सपर्ट टीम को बुलाया है.
डीएफओ संदीप शिंदे ने एक वीडियो जारी कर लोगों से अपील की है कि रात में घरों से बाहर न निकले, बहुत जरूरी होने पर ही निकलें.
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले छह महीने से हाथियों का झुंड रामगढ़ और बोकारो के सीमावर्ती क्षेत्रों में अपना डेरा जमाए हुए हैं. हाथियों के हमले में लोगों के मारे जाने का सिलसिला जारी है. वन विभाग हाथियों को उनके सुरक्षित कॉरिडोर में भेजने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है.
डेढ़ महीने में 40 लोगों की मौत
गौरतलब है कि डेढ़ महीने के दौरान हाथियों के हमले में झारखंड के अलग-अलग इलाके में कम से कम चालीस लोगों की मौत हुई है. बड़ पैमाने पर फसलों और अनाज का नुकसान हो रहा है. हाथी ग्रामीणों के घरों को ढा रहे हैं. पिछले जनवरी महीने में चाईबासा के अलग- अलग इलाके में एक हाथी ने एक के बाद एक कर 22 लोगों को मार डाला था. हाल ही में रांची जिले के राहे इलाके में हाथी के हमले में एक किसान की मौत हुई है.
आंकड़ों से पता चलता है कि झारखंड में पिछले पांच सालों में हाथियों द्वारा फसलों के नुकसान पहुंचाने के हर साल औसतन 9245 और अनाज क्षति के 1146 मामले दर्ज़ किए गए हैं.
किसानों के मुताबिक सैकड़ों घटनाओं की रिपोर्टिंग नहीं होती. राज्य सरकार के वन विभाग के ही आंकड़े के मुताबिक पिछले चार वर्षों (2021-2025 मार्च) तक में हाथियों ने 397 लोगों की जान ली है.
जाहिर तौर पर हाथी-मानव संघर्ष को लेकर सुर्खियों में रहे झारखंड में आदिवासी, किसान, खेतिहर मजदूर एक बड़ी बेबसी से गुजर रहे हैं. खासकर जंगलों-पहाड़ों से घिरे-सटे और तलहटी वाले गांवों में तबाही का अंतहीन सिलसिला जारी है. जान- माल की लगातार क्षति हो रही है.
