रांचीः झारखंड में शहरी निकायों के चुनाव भले ही गैर दलीय आधार पर कराये जा रहे हैं, पर चुनाव को लेकर सियासत गरमाती जा रही है. खासकर नगर निगम में मेयर पद के लिए होने वाले चुनाव में सत्तारूढ़ दलों और मुख्य विपक्ष भाजपा के बीच टसल तीखा होता जा रहा है. जमशेदपुर का मानगो नगर निगम भी इसमें शामिल है, जो कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता तथा सरयू राय के लिए नाक का सवाल बना है. सरयू राय अभी जमशेदपुर पश्चिम से जेडीयू विधायक हैं. दोनों नेता एक दूसरे के धुर विरोधी रहे हैं.
मानगो नगर निगम में मेयर पद के लिए बन्ना गुप्ता की पत्नी सुधा गुप्ता कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार हैं. उधर बन्ना गुप्ता ने अपनी पत्नी की चुनावी नैया पार कराने के लिए पतवार अपने हाथों में संभाल रखा है.
उनके मुकाबले भाजपा और जदयू (एनडीए) ने संध्या सिंह को समर्थन दिया है. संध्या सिंह के समर्थन में सरयू राय चुनावी प्रत्यक्ष-अपोक्ष तौर पर बिछाने में जुटे हैं. संध्या सिंह के पति नीरज सिंह भाजपा के नेता हैं.
संध्या सिंह ने नामांकन दाखिल करने के बाद सरयू राय के आवास पर जाकर आशीर्वाद लिया था.
यहां भाजपा को चुनावी मोर्चे पर थोड़ी राहत इसलिए भी है कि सरयू राय, संध्या सिंह के लिए समीकरण साधने में जुटे हैं. सोशल मीडिया पर भी सरयू राय मतदाताओं से बेहतर निर्णय लेने की अपील कर रहे हैं. साथ ही इन बातों पर भी जोर दे रहे हैं कि पति (बन्ना गुप्ता) चुनाव हार गए, तो पत्नी को मेयर बनाने के लिए बेताब हैं.
हालांकि संध्या सिंह को भी अपनों से टक्कर का सामना करना पड़ सकता है. भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष राजकुमार श्रीवास्तव की दावेदारी और सक्रियता ने पार्टी के नेताओं को परेशान कर रखा है. बनिता सहाय और राईमुनी सुंडी की दावेदारी से भी बीजेपी की उलझनें कायम है.
जाहिर तौर पर समर्थन हासिल करने की कवायद से समीकरण अभी से बनने- बिगड़ने लगे हैं.
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरूण सिंह, प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू समेत कई प्रमुख नेता जमशेदपुरर पहुंचकर चुनावी हालात का जायजा ले चुके हैं. इन नेताओं ने अलग-अलग स्तरों पर बैठकें भी की है.

नौ नगर निगम, मानगो में 13 उम्मीदवार
झारखंड राज्य में नौ नगर निगम हैं. 23 फरवरी को चुनाव है. इनमें मानगो नगर निगम में 13 उम्मीदवार मैदान में हैं. मानगो नगर निगम में वार्ड की संख्या 36 है. एक लाख 96,791 वोटर इन उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे.
मानगो जमशेदपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है. 2024 के विधानसभा चुनाव में सरयू राय ने बन्ना गुप्ता को हराया था. तब बन्ना झारखंड सरकार में मंत्री थे. इससे पहले 2009 में बन्ना गुप्ता ने सरयू राय को हराया था. फिर 2014 में सरयू राय ने बन्ना गुप्ता को शिकस्त दी. मतलब दोनों में राजनीतिक अदावत पुरानी है. सरयू राय बन्ना गुप्ता के स्वास्थ्य मंत्री रहते विभाग के कामकाज और कथित अनिमियतताओं को लेकर भी सवाल खड़े करते रहे हैं. बदले मे बन्ना गुप्ता भी कई मौके पर निशाने साधते रहे हैं.

जेबा खान की बगावत
मानगो नगर निगम चुनाव को लेकर बनते- बिगड़ते समीकरणों के बीच बगावत कर चुनाव लड़ रहीं शाइस्ता परवीन उर्फ जेबा खान को कांग्रेस पार्टी ने निलंबित कर दिया है. जिला कमेटी की अनुशंसा पर यह कार्रवाई की गई है. जिला कमेटी के पदाधिकारियों ने रविवार को प्रेस कांफ्रेस में यह जानकारी साझा की.
इससे पहले कांग्रेस नेताओं की बैठक हुई. इसमें पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस अध्यक्ष परविंदर सिंह, जिला पर्यवेक्षक सह जिला प्रभारी बलजीत सिंह बेदी के अलावा पूर्व जिला अध्यक्ष आनंद बिहारी दूबे, रामाश्रय प्रसाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता रियाजुद्दीन खान के अलावा कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे.
जेबा खान के निलंबन का असर समीकरणों पर पड़ने से इनकार नहीं किया जा रहा. दरअसल मानगो का बड़ा इल्का मुस्लिम आबादी वाला रहा है. और मुस्लिम बहुल इलाके में युवाओं के बीच जेबा की अच्छी पकड़ रही है. अब उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने के बाद वे और भी बगावती मूड में आ गई हैं.
रविवार को सुंदर वन इलाके में अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ बैठक कर उन्होंने रणनीति बनाई. कांग्रेस की नेता रीना सिंह भी जेबा के समर्थन में दिखीं.
जेबा ने अपने निलंबन का दुर्भाग्यपूर्ण बताया और आरोप लगाया कि बन्ना गुप्ता के दबाव में पार्टी ने यह कार्रवाई की है. उन्होंने कहा, “मानगो इस अपमान का बदला जरूर लेगा. अब किसी नेता या पार्टी के पिछलग्गू नहीं बनेंगे मानगो के लोग.”
जेबा खान झारखंड प्रदेश कांग्रेस की सचिव थीं. राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक तौर पर सक्रिय रही हैं. राहुल गांधी के साथ कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत जोड़ो अभियान में शामिल थी.
जब बन्ना फूट-फूट कर रोने लगे
रविवार को जमशेदपुर के मानगो बामनगोड़ा चौक में पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता अपनी पत्नी सुधा गुप्ता के पक्ष में प्रचार करते हुए मंच पर रो पड़े. दरअसल, यह दृश्य तब सामने आया, जब एक कार्यकर्ता ने मंच से अपने परिजन के इलाज में मिली मदद की कहानी साझा की. कार्यकर्ता ने बताया कि वह पहले एआईएमआईएम के लिए कार्य करता था, लेकिन उसके परिजन के इलाज में गंभीर आर्थिक संकट के वक्त बन्ना गुप्ता ने आगे बढ़कर उसकी मदद की.
यह बात सुनते ही मंच पर मौजूद बन्ना गुप्ता भावुक हुए. उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े और वे फफक-फफक कर रोने लगे. कार्यकर्ताओं ने उन्हें संभाला और समर्थन मे नारे लगाए.
