रांचीः झारखंड विधानसभा में शनिवार को पेयजल स्वच्छता विभाग और उत्पाद मद्य निषेध विभाग के बजट में कटौती प्रस्ताव के पक्ष में बोलते हुए झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के विधायक जयराम कुमार महतो ने कहा कि झारखंड आंदोलन के पुरोधा दिशोम गुरुजी और शहीद निर्मल महतो शराब के खिलाफ थे. झारखंड सरकार को बिहार और गुजरात की तर्ज पर झारखंड में शराब बंदी के लिए आगे बढ़ना चाहिए.
उन्होंने कहा कि झारखंड के युवा शराब की लत में बर्बाद हो रहे हैं. सड़क दुर्घटनाओं में 18 से 25 साल के युवा जान गंवा रहे हैं. उन्होंने तर्क दिया कि यह अबुआ दिशोम का बजट है और दिशोम गुरु शिबू सोरेन व निर्मल महतो हमेशा शराब के विरोधी रहे हैं, अतः उनके सम्मान में बिहार की तर्ज पर यहां भी शराबबंदी होनी चाहिए.
इसके जवाब में उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि यदि विपक्ष केंद्र सरकार से झारखंड का बकाया 2 लाख करोड़ रुपये वापस दिला दे, तो राज्य सरकार बिहार की तर्ज पर शराबबंदी पर विचार करने को तैयार है.
सदन में गहमागहमी के बीच पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के बजट पर भी चर्चा हुई.
उत्पाद राजस्व में भारी बढ़ोतरी
उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री ने सदन में राजस्व के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि पिछले 25 वर्षों की तुलना में वर्तमान सरकार के कार्यकाल में उत्पाद राजस्व में भारी बढ़ोतरी हुई है, जो पारदर्शी प्रबंधन का प्रमाण है.
शराब घोटाले पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के तीखे सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि एसीबी पुख्ता सबूतों के साथ चार्जशीट दाखिल करेगी ताकि दोषियों को कानूनी लाभ न मिल सके.
उत्पाद सिपाहियों की भर्ती में हो रही देरी पर उन्होंने स्वीकार किया कि नियमों में संशोधन के कारण विलंब हुआ है। लेकिन जल्द ही नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी.
राज्य की जेलों में मोबाइल फोन के अवैध इस्तेमाल को रोकने के लिए मंत्री ने अहम जानकारी दी. उन्होंने कहा कि एक सप्ताह के भीतर जेलों में 5G जैमर लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.
जल-नल योजना की धीमी गति
मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने जल-नल योजना की धीमी प्रगति के लिए सीधे तौर पर केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया.
उन्होंने सदन को बताया कि 24,665 करोड़ रुपये की इस योजना में केंद्र और राज्य की 50-50 प्रतिशत की हिस्सेदारी है.
केंद्र से अब तक मात्र 5,987 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जबकि राज्य सरकार अपने कोटे से 7,385 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है. उन्होंने कहा कि कई बार केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय से संपर्क करने के बावजूद बकाया राशि नहीं मिली है.
