केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में वामपंथी उग्रवाद पर चर्चा के दौरान सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह नरेंद्र मोदी की सरकार है और जो भी हथियार उठाएगा, उसका हिसाब चुकता किया जाएगा.
अमित शाह ने कहा कि पहले ‘रेड कॉरिडोर’ के नाम से पहचाने जाने वाले क्षेत्रों में 12 राज्य और करीब 70 प्रतिशत भूभाग शामिल था. उन्होंने दावा किया कि अब इन इलाकों में स्थिति में बड़ा बदलाव आया है और नक्सलवाद तेजी से खत्म हो रहा है.
गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद लगभग समाप्ति की ओर है और अब वहां विकास कार्य तेज हुए हैं. उन्होंने बताया कि गांव-गांव में स्कूल और राशन की दुकानें खोली गई हैं, जिससे आम लोगों को सीधा लाभ मिल रहा है.
कांग्रेस पर साधा निशाना
उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य 31 मार्च तक नक्सल-मुक्त भारत का था. पूरी प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी होने के बाद देश को सूचित किया जाएगा, मगर मैं ऐसा बोल सकता हूं कि हम नक्सल मुक्त हो गए हैं.”
इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस ने देश में ‘नक्सलवाद’ ख़त्म करने के लिए कुछ नहीं किया.
अमित शाह संसद में ‘देश को वामपंथी उग्रवाद से मुक्त कराने के प्रयासों’ पर हुई बहस का जवाब दे रहे थे.
अमित शाह ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि 70 साल तक शासन करने के बावजूद आदिवासी क्षेत्रों का विकास नहीं हो पाया. उन्होंने सवाल उठाया कि इतने लंबे समय में बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं पहुंचीं.
गृह मंत्री ने विपक्ष से कहा कि वे पहले अपने कार्यकाल का आकलन करें. उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व सरकारों ने आदिवासी क्षेत्रों में न तो बुनियादी ढांचा विकसित किया और न ही बैंकिंग व शिक्षा जैसी सुविधाएं पहुंचाईं.
उसी से बातचीत
अमित शाह ने माओवादियों के सरेंडर से जुड़ी सरकार की नीति का भी ज़िक्र किया और कहा कि ‘जो हथियार डालता है, उसी से बातचीत होती है और गोली का जवाब गोली से दिया जाता है’.
उन्होंने कहा, “कुछ लोग चर्चा से नहीं मानते, उनके ख़िलाफ़ बल प्रयोग करना पड़ता है. उनके अत्याचार से निर्दोष नागरिकों को बचाना पड़ता है. इन्होंने किसानों के खेतों में बम लगाकर उन्हें अपंग बना दिया गया. बच्चों के स्कूलों में रेड कर उन्हें भर्ती किया गया. मोदी सरकार में हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है. कोई समझ जाए तो ठीक है, नहीं तो फ़ोर्स इसी दिन के लिए बनाई गई है.”
सरेंडर की जानकारी
केंद्रीय गृह मंत्री ने माओवादियों के सरेंडर से जुड़ी जानकारी भी दी.
उन्होंने कहा, “मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की स्टेट कमेटियों के सदस्य सरेंडर कर चुके हैं. ओडिशा में जो चार बचे थे, उनमें से एक ने सरेंडर किया और तीन मारे गए. तेलंगाना में छह ने सरेंडर किया, तीन मारे गए. अब वहाँ एक भी नहीं बचा है.”
उन्होंने कहा, “इस प्रकार उनका पॉलित ब्यूरो और सेंट्रल स्ट्रक्चर लगभग समाप्त हो चुका है. हमारा लक्ष्य 31 मार्च तक नक्सल-मुक्त भारत का था. पूरी प्रक्रिया औपचारिक रूप से पूरी होने के बाद देश को सूचित किया जाएगा, मगर मैं ऐसा बोल सकता हूं कि हम नक्सल मुक्त हो गए हैं.”
