रांचीः केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा है कि देश वैश्विक संकट से गुजर रहा है. इससे उबरने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है. आत्म निर्भर भारत हो, इसके लिए सबको आगे आना होगा.
केंद्रीय मंत्री शुक्रवार को अबुआ अधिकार मंच के बैनर तले होटल बीएनआर चाणक्या में आयोजित सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे.
उन्होंने कहा कि वैश्विक संकट को लेकर प्रधानमंत्र नरेंद्र मोदी ने अपील की है, जिसमें इंधन बचाने और सोना नहीं खरीदने का आग्रह किया है. उन्होंने खुद इसका अनुपालन शुरू किया है. सभी देशवासियों से भी सरकार सहयोग की अपेक्षा करती है.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि. हमारी सरकार दूसरे पर हम कतई निर्भर नहीं रहना चाहती. आत्म निर्भर भारत हो, इसके लिए सबको आगे आना होगा. कोल से गैस, केमिकल का निर्माण के लिए हम आगे बढ़ने की कवायद में जुटे हैं. इसका भी शोध चल रहा है कि और भी केमिकल पर भाकत मजबूत पकड़ बना सके.
पर्यावरण को अहमियत
उन्होंने कहा कि पर्यावरण को अहमियत देने से ही प्रकृति संतुलित रहेगी. पर्यावरण की अहमियत समझने के लिए हर किसी को आगे आने के साथ अपनी भूमिका तय करनी चाहिए. पेड़, पौधे संरक्षित करने से ही जल भी सुरक्षित होता है.
उन्होंने कहा कि पर्यावरण के संरक्षण की ओर लोगों की इच्छा शक्ति बढ़ी है. इस इच्छा शक्ति के बेहतर परिणाम निकलें, इसका ख्याल प्राथमिकता में हो और इसके लिए एक पेड़ जरूर लगायें. पेड़ों को बचायें भी. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पेड़ मां का नाम मुहिम का सकारात्मक परिणाम सामने है.
संत, तपस्वी भी प्रकृति के प्रेमी
उन्होंने कहा कि जंगल हमारा जीवन रक्षक है. तपस्वी और संत विचार धारा के लोगों का प्रकृति से प्रेम सदियों से रहा है. केंद्रीय मंत्री ने अबुआ अधिकार मंच के इस कार्यक्रम की सराहना की और कहा कि पहले प्रयास में इतना शानदार प्रोग्राम किया है. युवा अपने अभियान में निरतंर आगे बढ़ें.
झारखंड में 147 कोयला खदानें बंद होंगी
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 147 कोल खदान बंद हैं उसे फाइनली बंद करने का निर्णय लिया गया है. इसके बाद सेल्फहेल्फ ग्रुप बनाकर उन रैयतों की जमीन सुपुर्द करेंगे, जिन्होंने खदानों के लिए जमीन दी थी.
उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने वन डिस्क्ट्रिक्ट वन प्रोडेक्ट के स्लोगन के तहत हमने बोकारो में जो खुली खदानें हैं, उनकी 109 हेक्टेयर जमीन पर कटहल और आम के पौधे लगाने के निर्देश दिए हैं. खुली खदानों में जो पानी है उसमें मत्स्य पालन के साथ मखाना लगाने की जरूरत है.
