बिहार की सियासत में एनडीए के घटक राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को लेकर नया सवाल खड़ा हो गया है. क्या दीपक प्रकाश को मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ेगा.
दरअसल, राज्य में 18 जून को विधान परिषद का चुनाव होने जा रहा है, जिसके लिए एनडीए के नौ उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है, लेकिन इनमें दीपक प्रकाश का नाम शामिल नहीं है.
दीपक प्रकाश अभी सम्राट चौधरी की अगुवाई में चल रही बिहार में एनडीए क सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं, लेकिन वो न तो विधानसभा और न ही विधान परिषद के सदस्य हैं.
संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक़ दीपक प्रकाश को मंत्री बने रहने के लिए छह महीने के अंदर किसी एक सदन का सदस्य बनना अनिवार्य है.
बिहार में विधान परिषद के लिए अगला चुनाव मार्च 2027 में होगा. यानी अगर उस वक़्त दीपक प्रकाश को विधान परिषद की सदस्यता मिल भी जाए तो फ़िलहाल उन्हें अपना मंत्री पद गंवाना पड़ सकता है.
राजनीतिक गलियारों में उनके कई संभावित विकल्पों को लेकर चर्चा हो रही है. हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक फैसला या घोषणा सामने नहीं आई है.
कौन हैं एनडीए के नौ उम्मीदवार
एनडीए के जिन नौ उम्मीदवारों ने विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया है, उनमें जेडीयू के निशांत कुमार भी शामिल हैं, जो पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे हैं.
निशांत कुमार भी फ़िलहाल बिहार विधानसभा में किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं.
इसके अलावा जेडीयू ने भारती मेहता, शिवानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद को अपना उम्मीदवार बनाया है.
वहीं बीजेपी ने संजय मयूख, पवन सिंह, अनिल कुमार ठाकुर, शीला पंडित और अशरफ़ अंसारी को उम्मीदवार बनाया है.
नीतीश की सरकार में भी
इससे पहले दीपक प्रकाश 20 नवंबर 2025 को राज्य में नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री बनाए गए थे, उस वक़्त भी वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे. तब यह समझा जा रहा था कि निकट में होने वाले विधान परिषद के चुनाव में उन्हें सदस्य बनने का मौका मिलेगा.
बिहार विधानसभा चुनावों में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा को एनडीए के साझेदार के तौर पर छह सीटें दी गई थीं. इनमें बजपट्टी, मधुबनी, सासाराम और दिनारा सीटों पर आरएलएम ने जीत दर्ज की.
इनमें उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा भी शामिल हैं, जो सासाराम सीट से विधायक हैं.
