रांचीः हेमंत सोरेन सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार का शनिवार देर रात गिरिडीह मे निधन हो गया है. वे गिरिडीह से जेएमएम के विधायक थे. सरकार में उच्च शिक्षा तकनीक मंत्री के साथ पर्यटन विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. सुदिव्य कुमार के निधन पर शोक संदेश का तांता लगा है. सत्तारूढ़ दलों साथ विपक्षी दलों के नेताओं ने उनके निधन पर गहरी संवेदना प्रकट की है.
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा है, “सुदिव्य कुमार सोनू जी के निधन की खबर से मन अत्यंत व्यथित है. वे कुशल जनप्रतिनिधि एवं जनसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्व थे. उनका निधन झारखंड की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है. ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोक संतप्त परिजनों एवं समर्थकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें.”
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है. उन्होंने सोशल मीडिया हैंडल पर कहा है, सुदिव्य कुमार सोनू का असामयिक निधन का समाचार अत्यंत दुखद एवं हृदयविदारक है. उनका निधन राज्य के लिए एक अपूरणीय क्षति है. ईश्वर शोकाकुल परिजनों एवं समर्थकों को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें.
उधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने अपने शोक संदेश में कहा है कि पूरी कांग्रेस पार्टी इस दुख की घड़ी में उनके शोकाकुल परिवार के साथ है.

सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने एक्स पर कहा है, आज की सुबह की शुरुआत बेहद दुखद खबर के साथ हुई. हमारे साथी मंत्री रहे, भाई सुदिव्य सोनू अब हमारे बीच नहीं हैं. इस खबर पर विश्वास नहीं हो रहा है. उनका अचानक चले जाना मेरे लिए एक निजी क्षति है. उनका सहज स्वभाव, आत्मीय व्यवहार और जनसेवा के प्रति समर्पण हमेशा स्मरण रहेगा.
दीपिका पांडेय अपने कैबिनेट सहयोगी को श्रद्धांजलि देने गिरिडीह पहुंची हैं. उन्होंने एक पोस्ट में कहा,. इस दुखद घड़ी में उनके पार्थिव शरीर पर श्रद्धा-सुमन अर्पित कर विनम्र श्रद्धांजलि दी, शोक संतप्त परिजनों से मिलकर गहरी संवेदना व्यक्त की और उनके अपार दुख में सहभागी बनी. ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस असहनीय पीड़ा को सहन करने की शक्ति प्रदान करें.
राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भावुक होकर अपने सहयोगी मंत्री को कुछ इस तरह याद किया है, “अभी परसों ही सुदिव्य कुमार सोनू से मुलाकात हुई थी. राज्य के वर्तमान राजनीतिक हालात से लेकर पलामू किले के जीर्णोद्धार तक कई विषयों पर उनसे बातचीत हुई थी. तब जरा भी अंदाजा नहीं था कि यह मुलाकात आखिरी होगी. दो दिन पहले तक साथ बैठकर राज्य और समाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने वाला अपना व्यक्ति अचानक हमेशा के लिए दूर हो जाएगा, यह सोचकर ही मन विचलित हो उठता है.”
