रांचीः एंटी करप्शन ब्यूरो ने रांची के व्यवसायी विनय कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया है. उन पर हजारीबाग में गैर मजरुआ खास किस्म की जमीन की अवैध तरीके से जमाबंदी कराने का आरोप है.. इस मामले में वे प्राथमिकी अभियुक्त थे.
विनय सिंह नेक्सजेन ऑटोमोबाइल के संचालक हैं. उनके कई राजनेताओं और आला अफसरों से अच्छे ताल्लुकात रहे हैं.
एसीबी ने यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, हजारीबाग थाना काण्ड सं0-11/25 में की है.
इससे पहले सरकार से प्राथमिकी दर्ज करने की अनुमति मागी गयी थी.
यह कांड धारा- 120B IPC, R/W 420, 467, 468, 471 IPC 1860 और धारा 13(2) R/W 13(1)(d) PC Act के तहत दर्ज किया गया था.
एसीबी की तफ्तीश में ये तथ्य उजागर हुए है कि विनय सिंह ने गैर मजरूआ खास किस्म जंगल खाते की भूमि जिनकी जमाबंदी समानंतर आधार पर अधिकारियों के साथ आपराधिक षड्यंत्र करते हुए कराई और सामूहिक तौर पर अनैतिक लाभ प्राप्त करने का संज्ञेय अपराध किया .
इन्ही आरोपों में विनय कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया है.
आपराधिक षड़यंत्र करके
एसीबी ने जारी बयान में बताया है कि उपायुक्त कार्यालय हजारीबाग द्वारा वर्ष 2013 में पांच प्लॉट का अवैध जमाबंदी को रद्द किया गया था. उक्त रद्द किये गये जमाबंदी को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, झारखण्ड सरकार द्वारा 2013 में ही सम्पुष्ट किया गया.
गौरतलब है कि इस संबंध में कार्यालय वन प्रमण्डल पदाधिकारी, हजारीबाग ने एक पत्र लिखा था. इसमें यह उल्लेख है, ” अधिसूचित वनभूमि में किसी प्रकार का गैर वानिकी कार्य एवं अतिक्रमण भारतीय वन अधिनियम, 1927 एवं वन संरक्षण अधिनियम, 1980 का उल्लघंन है.”
सर्वोच्च न्यायालय ने भी गोदावर्मन बनाम भारत सरकार के मामले में उल्लेख किया है कि जंगल-झाड़ी दर्ज किसी भूमि का भारत सरकार के पूर्वानुमति के बिना गैर वानिकी कार्य में उपयोग वन संरक्षण अधिनियम, 1980 का उल्लघंन होगा.”
दाखिल-खारिज कर दिया
हजारीबाग जिले में ‘गैर मजरुआ खास किस्म जंगल’ प्रकृति की जमीन, जिसे डीम्ड वन की श्रेणी में रखा गया है. इसमे हुए घोटाले का एसीबी की जांच में खुलासा हुआ था.
संरक्षित वन क्षेत्र की जमीन को विनय कुमार सिंह और उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह के नाम पर अवैध रूप से दाखिल-खारिज भी कर दिया गया. उस वक्त हजारीबाग के उपायुक्त विनय कुमार चौबे थे.
शराब घोटाले में भी नाम आया था
विनय सिंह झारखंड में हुए शराब घोटाले में भी एसीबी के रडार पर आए थे. एसीबी ने उनके खिलाफ वारंट भी जारी किया था, लेकिन उन्होंने कोर्ट से उन्हें राहत की सुविधा मिली थी.
शराब घोटाले में ही भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी विनय कुमार चौबे समेत कई अधिकारियों और शराब कारोबारियों को गिरफ्तार किया गया था.
हालांकि समय पर जांच एजेंसी के द्वारा चार्जशीट दाखिल करने पर आरोपियों को हाइकोर्ट से जमानत मिल गई है.
