रांचीः असम के के रोंगोनदी और चाबुआ विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा को संबोधित करने के लिए हेमंत सोरेन के हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की अनुमति नहीं मिलने पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की है.
सोशल मीडिया के अपने अकाउंट एक्स पर उन्होंने कहा है, “असम की वीर और क्रांतिकारी धरती पर लोकतंत्र की आवाज़ को दबाने की फिर कोशिशें की गईं. कल कल्पना जी को सभा करने से रोका गया, आज मुझे असम के रोंगोनदी और चाबुआ विधानसभा के अपने भाई-बहनों से मिलने नहीं दिया गया. ”
हेमंत ने आगे कहा है, “क्या सच में विरोधियों को लगता है कि संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर ऐसे षड्यंत्र से वे तीर-धनुष की ताकत को रोक पाएंगे? इतिहास गवाह है, जब-जब आवाज़ दबाई गई है, वह और बुलंद होकर उभरी है. आगामी 9 अप्रैल को तीर-धनुष पर बटन दबाकर मेरे ये लाखों भाई-बहन अपने संघर्ष का हिसाब लेकर रहेंगे.”
हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी साझा किया है, जिसमें वे मोबाइल फोन से रोगंनदी और चाबुआ की सभा को संबोधित कर रहे हैं. इसमें वे कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी सभा को लेकर उनके हेलीप्टर को उड़ान भरने की अनुमति नहीं मिली.
रविवार को कल्पना का हेलीकॉप्टर
इससे पहले कल्पना सोरेन की कुछ तस्वीरें और वीडियो क्लीप सियासत की सुर्खियों में हैं. दरअसल रविवार को खुमताई, नहरकटिया एवं मार्गेरीटा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सभा करनी थी.
कल्पना सोरेन ने आरोप लगाया है कि प्रशासन द्वारा हेलीपैड की स्वीकृति नहीं दिए जाने के कारण वे खुमताई, नहरकटिया की सभा में नहीं पहुंच सकी.

हालांकि, असम के दूसरे छोर पर स्थित मार्गेरीटा विधानसभा क्षेत्र के कार्यक्रम में सड़क मार्ग से जाते उन्होंने फोन के माध्यम से खुमताई, नहरकटिया की जनता को संबोधित किया और अपना संदेश पहुंचाने की कोशिशें की.
इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडया पर टिप्पणी की है- “असम में जिस लड़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं, उसमें इस तरह की रुकावटों का अंदेशा हमें पहले से था. हमें मालूम था कि सत्ता में बैठे लोग हमारी आवाज़ को रोकने, हमारे कदमों को थामने और जनता तक हमारे संदेश को पहुंचने से रोकने की हर संभव कोशिश करेंगे. लेकिन मैं सत्ता में बैठे लोगों से कहना चाहती हूँ —आप रास्ता रोक सकते हैं, लेकिन जनआक्रोश नहीं रोक सकते.”
एक दिन पहले सोनारी विधानसभा क्षेत्र में एक चुनावी सभा में हेमंत सोरेन ने भी हिमंता सरकार पर निशाने साधे थे.
तब उन्होने कहा था. सुना है विरोधियों द्वारा लोगों को यहां डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है. अब यह सब चलने वाला नहीं है. क्योंकि अब शोषित, वंचित और आदिवासी समाज एकजुट हो चुका है और वह लड़कर अपना अधिकार लेकर रहेगा.
गौरतलब है कि असम विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही चुनावी रणनीतिकार और दलों के दिग्गज तरकश के हर तीर खाली करते नजर आ रहे हैं.
यहां भारतीय जनता पार्टी गठबंधन और कांग्रेस गठबंधन के बीच सीधी लड़ाई है, पर झारखंड में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने चुनावी दंगल में खम ठोंकते हुए राजनीतिक दिग्गजों के माथे पर बल ला दिये हैं. हेमंत सोरेन और -कल्पना सोरेन की जोड़ी धुआंधार रैलियां कर रही हैं.
हेमंत सोरेन दस दिनों से वहां कैंप कर रहे हैं और कल्पना के जमते भी हफ्ते दिन होने को हैं. वैसे झारखंड मुक्ति मोर्चा सिर्फ 16 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है. असम में 126 सीटें हैं और एक ही चरण में 9 अप्रैल को चुनाव है.
हालांकि16 सीटों पर चुनाव लड़ने के बाद भी हेमंत- कल्पना ने आदिवासी और खासकर चायबगान की राजनीति तथा मुद्दे को चुनाव के केंद्र में ला खड़ा किया है.
