रांची: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकारी खजाने में पिछले बीस सालों के लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का कथित तौर पर हिसाब नहीं मिलने के मामले में सरकार पर लगातार हमलावर हैं.
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ वित्तीय अनियमितता नहीं है बल्कि सत्ता के शीर्ष स्तर पर जवाबदेही से बचने की सुनियोजित कोशिश है.
नेता प्रतिपक्ष ने सोशल मीडिया के एक्स पर आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कांग्रेस कोटे के मंत्रियों को पूरी तरह पंगु बना दिया है और शासन-प्रशासन का पूरा नियंत्रण अपने हाथों में केंद्रित कर लिया है. वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर द्वारा जब इस भारी भरकम राशि का हिसाब मांगा गया, तो किसी भी विभाग ने जवाब देना जरूरी नहीं समझा.
बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि वित्त मंत्री ने इस मामले को लेकर अधिकारियों की बैठक बुलाने के निर्देश दिए थे लेकिन न तो बैठक हुई और न ही किसी अधिकारी ने मंत्री को स्पष्टीकरण दिया. उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकारी खजाने से पैसा निकाला गया है, तो उसका उपयोग कहां हुआ, इसका लेखा-जोखा आखिर किसके पास है?
मरांडी ने कहा है, जांच से जुड़ी फाइल तीन महीनों से मुख्य सचिव के स्तर पर दबाकर रखी हुई है जबकि मुख्यमंत्री की रहस्यमयी चुप्पी कई संदेहों को जन्म दे रही है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से वित्त मंत्री के निर्देशों की खुली अवहेलना हो रही है, उससे साफ संकेत मिलता है कि अधिकारियों को ऊपर से चुप रहने का इशारा मिला हुआ है. जबकि यह मामला अब केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सच्चाई सामने लाने से डर रही है.
