रांचीः विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एंटी करप्शन ब्यूरो के एडीजी को एक पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने सीएजी रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए आरोप सगाया है कि रांची के डीएफओ रहते हुए राजीव लोचन बख्शी के कार्यकाल में सरकारी धन की लूट के ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जो प्रथम दृष्टया आपराधिक विश्वासघात और गबन की श्रेणी में आते हैं.
मरांडी ने मांग की है कि तत्कालीन वन प्रमंडल पदाधिकारी रांची वन प्रमंडल, राजीव लोचन बख्शी के विरुद्ध पद के दुरुपयोग, साक्ष्यों को मिटाने और करोड़ों के वित्तीय गबन करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर जांच के लिए एक एसआईटी गठित की जाए.
राजीव लोचन बख्शी अभी पीआरडी के निदेशक हैं. पीआरडी निदेशक के तौर पर सबसे ज्यादा समय तक वही इस पद पर रहे हैं.
इसके साथ ही वे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं. इस पद पर रहते हुए भी उनके कामकाज को लेकर सवाल उठते रहे हैं.
क्या लिखा है पत्र में
मरांडी ने एडीजी को लिए पत्र में बताया है, “रांची वन प्रमंडल में वर्ष 2013 से 2018 के बीच हुए उस संगठित भ्रष्टाचार की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ, जिसका पर्दाफाश प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा) की रिपोर्ट संख्या आ. एवं सा. I /01/2019-20 और IR No. E&G-1-45/2014-2015 में हुआ है. ऑडिट के दौरान यह पाया गया कि ₹1.80 करोड़ की सामग्री खरीद के मूल वाउचर गायब कर दिए गए और उसके समर्थन में ₹5.455 करोड़ के मजदूरी भुगतान वाले मस्टर रोल्स भी संदिग्ध और संभवतः बोगस हैं.”
नेता प्रतिपक्ष ने आगे कहा है कि भ्रष्टाचार की कार्यप्रणाली इतनी गहरी है कि ऑडिट दल द्वारा 95 मस्टर रोल्स की टेस्ट चेकिंग में ही नियमों के घोर उल्लंघन के साक्ष्य मिले हैं यथा मजदूरों का भुगतान बैंक खाते के बजाय नकद दिखाया गया और मस्टर रोल्स पर बिना किसी सत्यापन के भुगतान की प्रविष्टियाँ की गईं.
इसके अलावा पद के दुरुपयोग का एक और गंभीर साक्ष्य 7.35 हेक्टेयर वन भूमि के अपयोजन आदेश में मिलता है, जहाँ सरकार से पूर्वानुमति लिए बिना ही यूजर एजेंसी को अनुचित लाभ पहुँचाने हेतु नियमों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया. इसके अलावा, कैंपा फंड्स और एंटी-डिप्रेडेशन योजनाओं के अंतर्गत करोड़ों रुपये के अग्रिम भुगतान का समायोजन ऑडिट के समय तक नहीं किया गया था, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को छिपाने की मंशा को दर्शाता है.
मरांडी का कहना है कि उपरोक्त विवरण और संलग्न ऑडिट रिपोर्टों के आधार पर यह स्पष्ट है कि बख्शी ने अपने पद का उपयोग व्यक्तिगत लाभ और सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाने के लिए किया है.
अतः इस प्रकरण में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करते हुए एक विशेष जाँच दल एसआईटी का गठन कर इस पूरे घोटाले की सघन जाँच और फॉरेंसिक ऑडिट हो, ताकि इस तरह के स्वच्छन्द एवं वित्तीय अनियमितता करने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके.
