चाईबासाः चाईबासा के तांबो चौक पर पुलिस कर्मियों पर पथराव, नाजायज मजमा के आरोप में 16 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है. इनमें छह महिलाएं शामिल हैं. और सभी लोग आदिवासी समुदाय के हैं. पुलिस की इस कार्रवाई से ग्रामीणों और आदिवासी संगठनों में रोष है.
सदर अनुमंडल अधिकारी संदीप अनुरोग टोपने के बया पर 28 अक्टूबर को मुफ्फसिल थाना में एक प्राथमिकी दर्ज की गयी है. इसमें 74 नामजद समेत 500 अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है.
जिन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है उनमें डुबलिया कुंकल, राज तामड़िया, दुंबी सवैया, रवींद्र गागराई, अविनाश बिरूआ, साइमन तियू, नदीम सेक, मनीष चंद्र सामड, साहिल बिरूआ, सुमी लागुरी, ननिका पुरतती, तुलसी पुरती, लक्ष्मी कुंटिया, शिवानी सांवैया, दुखनी सांवैया और एक अन्य शामिल हैं.
प्राथमिकी में अधिकारी ने बताया है कि नो इंट्री के मामले में 27 अक्टूबर की दोपहर परिवहन मंत्री दीपकबिरूआ का आवास घेराव करने को लेकर लोगों ने तांबो चौक पर धरना- प्रदर्शन किया. लगभग 500 महिला पुरूषों ने नाजायज मजमा लगाकर सड़क को अवरूद्ध कर दिया. सड़क पर ही वेलोग चूल्हा जलाकर खाना पकाने लगे.
जबकि इसकी अनुमति नहीं थी. नाजायज मजा को सड़क से एक किनारे रहने को कहा जा रहा था. इसी दौरान उनलोगों ने पुलिस बल को लक्षित कर ईंट, पत्थर चलाने लगे. लाठी-डंडे से हमले किए. इसके बाद हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने पहले आंसू गौस के गोले छोड़े फिर लाठीचार्ज किया गया.
नो इंट्री की मांग कर रहे
गौरतलब है कि ग्रामीण चाईबासा बायपास पर दिन में नो इंट्री लगाने की मांग कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि खानिज पदार्थों को लेकर भारी वाहनों के चलने के कारण लगातार जावनेला सड़क दुघर्टनाएं हो रही है. इसी मांग को लेकर 27 अक्टूबर को ग्रामीण परिवहन मंत्री दीपक बिरूआ का आवास दरख्वास्त देने जा रहे थे. पुलिस ने उन्हें रोका तो वे तांबो चौक पर धरना पर बैठ गये. इसके बाद पुलिस से उनकी झड़प हुई.
बुधवार को इसी मामले में मधु कोड़ा के नेतृत्व में हो महासभा का एक प्रतनिधिमंडल ने उपायुक्त से मिलकर ज्ञापन सौंपा है. पुलिस की कार्रवाई से आदिवासी संगठनों में नाराजगी है.
