रांचीः माओवादियों के बड़े नेता और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ ’किशन दा’ का शुक्रवार को रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रांची) निधन हो गया.
वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे. गिरफ्तारी के बाद प्रशांत बोस को उनकी पत्नी शीला मरांडी और अन्य सहयोगियों के साथ रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल में रखा गया था.
नवंबर 2021 में झारखंड पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था 70 वर्ष से अधिक उम्र के प्रशांत बोस पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति दोनों के सदस्य थे और गिरफ्तारी के समय उन पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था.
प्रशांत बोस वर्ष 2004 में सीपीआई-एमएल (पीपुल्स वॉर) के साथ विलय होकर सीपीआई (माओवादी) बनने से पहले वे माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया (एमसीसीआई) के प्रमुख थे.
वे माओवादियों के उन प्रमुख विचारकों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने क्रांतिकारी ताकतों के पुनर्मिलन की प्रक्रिया का नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप सीपीआई (माओवादी) जैसे प्रभावशाली संगठन का गठन हुआ.
पश्चिम बंगाल के मूल निवासी बोस माओवादी आंदोलन के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक थे और उन्हें व्यापक रूप से सीपीआई-माओवादी महासचिव नंबाला केशव राव के बाद दूसरे स्थान पर माना जाता था।
प्रशांत बोस को 12 नवंबर 2021 को सरायकेला-खरसावां जिले के कांड्रा टोल ब्रिज के पास उसकी पत्नी शीला मरांडी के साथ गिरफ्तार किया गया था.
सुरक्षा एजेसिंयों के अनुसार झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में 200 से अधिक नक्सली वारदातों में वे शामिल रहे हैं. उसके नेतृत्व में कई बड़े हमले और संगठनात्मक निर्णय लिए गए, जो नक्सली गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते थे.
लंबे समय तक जेल में बंद रहने और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उनका शरीर कमजोर हो चुका था. उनके निधन के बाद सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस प्रशासन को अलर्ट किया गया है. और पोस्टमार्टम के बाद आगे की कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं.
