रांचीः प्रवर्तन निदेशालय ने तत्कालीन ग्रामीण विकास विभाग के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के आप्त सचिव संजीव कुमार लाल की पत्नी रीता लाल सहित आठ अन्य आरोप्यों को खिलाफ विशेष पीएमएलए की विशेष अदालत में दाखिल कर दी है. इन सभी पर ग्रामीण विकास विभाग के टेंडर घोटाले, कमीशनखोरी तथा अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप है.
इस अभियोजन के साथ, मामले में आरोपित किए गए आरोपियों की कुल संख्या 22 हो गई है.
टेंडर घोटाला मामले में झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग में एक बड़े भ्रष्टाचार सिंडिकेट की चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जाँच के सिलसिले में में ईडी ने चौथी चार्जशीट (पूरक अभियोजन शिकायत- पीसी) दायर दाखिल की है. इस केस में संजीव कुमार पूर्व मंत्री के साथ सह अभियुक्त हैं.
संजीव कुमार लाल (तत्कालीन मंत्री के निजी सचिव) की पत्नी रीता लाल पर प्रोसिड ऑफ क्राइम से संपत्तियां खरीदने और दागी धन को वैध आय के रूप में पेश करने का आरोप लगाया गया है.
चार्जशीट में रीता लाल समेत जिन आठ नए लोगों को आरोपी बनाया है, उनमें ठेकेदार, प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोगी और उनके परिवार के सदस्य शामिल हैं. इन पर टेंडर घोटाले में अवैध ढंग से पैसे लेने- देने और धनशोधन में उनकी सक्रिय भूमिका के लिए आरोपित किया गया है.
गौरतलब है कि झारखंड के ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम के पीएस संजीव लाल, सहायक जहांगीर आलम समेत अन्य के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी में लगभग 35 करोड़ की बरामदगी के बाद जांच एजेंसी ने पिछले साल संजीव लाल और उनके ससहायक जहांगीर आलम को गिरफ्तार किया था.
संजीव लाल झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं. ईडी की इस कार्रवाई के बाद सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था.
ठेकेदारों ने इंजीनियर वीरेंद्र राम को दी महंगी गाड़ियां
अभियोजन शिकायत में यह आरोपित किया गया है कि ठेकेदार राजेश कुमार और उनकी कंपनियां राजेश कुमार कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड और परमानंद सिंह बिल्डर्स एंड प्राइवेट कंपनी ने माना है कि उन्होंने 1.88 करोड़ की रिश्वत दी और दो लग्ज़री गाड़ियां टोयोटा इनोवा और टोयोटा फॉर्च्यूनर भी पूर्व मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम को बतौर गिफ्ट में दी.
ठेकेदार राधा मोहन साहू ने भी माना कि उन्होंने 39 लाख रुपये और एक टोयोटा फॉर्च्यूनर (जो उनके बेटे अंकित साहू के नाम पर थी, उसे रिश्वत के रूप में दी. ये तीनों गाड़ियां बाद में वीरेंद्र कुमार राम के पास से बरामद हुईं.
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लोग अफसरों के लिए पैसे जमा कर उनके पास पहुंचाते थे.
गौरतलब है कि अब तक ED ने इस मामले में अदालत से सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने और इन संपत्तियों को ज़ब्त करने की अनुमति मांगी है.
पूर्व मंत्री आलमगीर आलम को ईडी ने पहले ही गिरफ्तार किया है. वे अभी रांची जेल में बंद हैं.
जांच में यह भी सामने आया है कि ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम कथित तौर पर निविदाओं पर एक निश्चित कमीशन लेते थे. यह कमीशन उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल और उनके सहयोगियों द्वारा वसूला जाता था.
इस सिंडिकेट से जुड़े ठिकानों पर पहले की गई तलाशी में 37 करोड़ से अधिक की नकद राशि जब्त की गई थी.
इस अवैध नकदी को बाद में दिल्ली स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और एंट्री ऑपरेटरों के एक नेटवर्क के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग किया गया और इसका उपयोग कई महंगी संपत्तियां खरीदने में किया गया.
