रांची : झारखंड को वर्ष 2029 तक बाल विवाह से मुक्त कराने का लक्ष्य तय किया गया है. सोमवार को रांची में किशोर सशक्तिकरण एवं बाल विवाह उन्मूलन विषय पर यूनिसेफ झारखंड यूनिट के द्वारा आयोजित कार्यशाला में बाल विवाह को लेकर चिंता जताई गई. साथ ही इसे खत्म करने के लिए वृहद कार्य योजना पर जोर दिया गया.
रांची के विश्वा प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित इस कार्यशाला में सामाजिक संगठनों, बाल पत्रकारों तथा किशोर-किशोरियों ने भाग लिया. इस परामर्श सत्र का उद्देश्य राज्य में किशोर-किशोरियों के कल्याण, सशक्तिकरण और अवसरों को बेहतर बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों को मजबूत करके वर्ष 2029 तक झारखंड को बाल विवाह मुक्त बनाने की दिशा में ठोस प्रगति के लिए विचार-विमर्श तथा रणनीति बनाना था.
इस अवसर पर यूनिसेफ झारखंड की प्रमुख डॉ. कनीनिका मित्र ने कहा, इस परामर्श बैठक में झारखंड सरकार के द्वारा किशोर-किशोरियों के विकास एवं सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे योजनाओं एवं कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की गई है.
झारखंड में किशोर-किशोरियों की आबादी राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 22 प्रतिशत है. राज्य के किशोर-किशोरी अनेक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जिनमें एनीमिया, कम उम्र में विवाह, विद्यालय छोड़ने की समस्या, किशोरावस्था में गर्भधारण, कौशल और आजीविका के सीमित अवसर तथा नुकसानदायक प्रथाओं मसलन ऑनलाइन जोखिम और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बढ़ती समस्याएं शामिल हैं.
इन चुनौतियों से निपटने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, संरक्षण और सशक्तिकरण के क्षेत्र में समन्वित निवेश राज्य में सतत मानव विकास को जरूरी बताया गया.
इस अवसर पर यूनिसेफ झारखंड की प्रमुख डॉ. कनीनिका मित्र ने कहा, इस परामर्श बैठक में झारखंड सरकार के द्वारा किशोर-किशोरियों के विकास एवं सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे योजनाओं एवं कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की गई है.

सरकार बाल विवाह की रोकथाम के लिए राज्य और जिला स्तर पर कार्य योजनाओं के माध्यम से काम कर रही है, जिसके माध्यम से लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने, सामाजिक सुरक्षा, किशोरों के स्वास्थ्य और पोषण, स्कूल स्वास्थ्य एवं कल्याण, मासिक धर्म स्वच्छता तथा बाल पत्रकारों और युवा समूहों के जरिए किशोर-किशोरियों की भागीदारी को मजबूत किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि झारखंड में बाल विवाह की स्थिति में सुधार हुई है. इसके बावजूद अभी 32 प्रतिशत अब भी बाल विवाह होते हैं.
डॉ. मित्र ने कहा कि यूनिसेफ झारखंड इन सभी प्रयासों को और बेहतर बनाने तथा किशोर-केंद्रित सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ाने में सरकार का लगातार सहयोग करता रहेगा, ताकि किशोर-किशोरियों की मांगों को उन नीतियों और कार्यक्रमों में शामिल किया जा सके, जो उनके जीवन से जुड़े हैं.
किशोरावस्था में सतत और समन्वित निवेश की आवश्यकता पर जोर देते हुए यूनिसेफ इंडिया की चीफ ऑफ फील्ड सर्विसेज सोलेडैड हेरेरो ने कहा कि किशोरावस्था अवसरों की एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवधि है. किशोरों की शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल, मानसिक स्वास्थ्य और संरक्षण में निवेश करके तथा बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं को समाप्त करके लंबी अवधि के लिए एक ठोस सामाजिक और आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है.
यूनिसेफ, झारखंड सरकार और भागीदारों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि किशोर-किशोरियों को नीति-निर्माण के केंद्र में रखा जाए.
परामर्श सत्र के दौरान बाल पत्रकारों और किशोर-किशोरियों ने भी किशोरावस्था को सशक्त बनाने के लिए अपने विचार प्रस्तुत किए.
इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकारी विभागों, सामाजिक संगठनों और सीएसआर भागीदारों ने किशोर-किशोरियों के विकास को मजबूती प्रदान करने तथा वर्ष 2029 तक झारखंड को बाल विवाह से मुक्त बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक अवसरों, चुनौतियों और सामूहिक कार्यों पर गहनतापूर्वक विचार-विमर्श किया और अपने सुझाव दिए गए.
इस बैठक में यूनिसेफ इंडिया की चीफ ऑफ फील्ड सर्विसेज सोलेडैड हेरेरो, यूनिसेफ के झारखंड प्रमुख डॉ. कनीनिका मित्र, रांची के जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज, जेएसएलपीएस के सुवाकांता नायक और पूर्णिमा मुखर्जी, विभिन्न सामजिक संगठनों के प्रतिनिधियों तथा यूनिसेफ के विशेषज्ञों – प्रीति श्रीवास्तव, आस्था अलंग, जोशिला पलापति तथा पारुल शर्मा उपस्थित रहे.
