झारखंड के अलग- अलग इलाके में हाथियों का उत्पात जारी है. हाथी लगातार लोगों की जान ले रहे हैं. खेतों में लगी फसलों को रौंद रहे हैं और ग्रामीणों के घरों को तोड़ रहे हैं. इसी क्रम में गढ़वा जिले में एक जंगली हाथी ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) परहैया से जुड़े बहेरवा गांव के 32 वर्षीय एक व्यक्ति को कुचलकर मार डाला है.
यह घटना रविवार रात उस समय घटी, जब कई ग्रामीण एक साथ बाजार से जंगलों के रास्ते घर लौट रहे थे. मेराल के वन यशवंत नायक ने बताया कि अचानक सात-आठ हाथियों का झुंड वहां आ गया, जिसे देख अन्य लोग भागने में सफल रहे, लेकिन बहेरवा गांव निवासी रमेश परहैया भाग नहीं सका और एक हाथी ने उसे कुचलकर मार डाला. इस घटना से बहेरवा गांव में शोक है.
नायक ने बताया कि मृतक के परिवार के सदस्यों को अंतरिम राहत के रूप में एक लाख रुपये का भुगतान किया गया है और मुआवजे की शेष राशि जल्द ही दी जाएगी. उन्होंने कहा कि रमेश के शव को पोस्टमार्टम के लिए गढ़वा सदर अस्पताल भेज दिया गया है.
गोरतलब है कि रविवार को ही लोहरदगा के कुड़ क्षेत्र में भी हाथियों ने एक आदिवासी व्यक्ति को पटककर मार डाला था.
गढ़वा के मेराल में हाथियों ने दो महीने के दौरान कम से कम पांच लोगों को कुचलकर मार डाला है.
हाल ही में रामगढ़ में भी हाथी ने एक व्यक्ति को कुचलकर मार डाला था. हाथियों के कोरिडोर को संरक्षित और सुरक्षित करने में वन विभाग की कोई दिलचस्पी नहीं है.
जंगलों- पहाड़ों से घिरे खूंटी के रनिया और कर्रा के कई गांव के लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं. हाथियों के उत्पात से तंग हाल ग्रामीणों की एक बड़ी बैठक रनिया में हुई थी.
