रांचीः झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तीन वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया है.
यह कार्रवाई सोशल मीडिया और फेसबुक लाइव के माध्यम से वर्तमान गठबंधन सरकार के और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विरुद्ध योगेंद्र साव की तल्ख टिप्पणियों के बाद की गई है.
कांग्रेस अनुशासन समिति ने इसे पार्टी की छवि धूमिल करने और संगठनात्मक नियमों का गंभीर उल्लंघन माना है.
इस समिति के चेयरमैन पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव हैं. उनके हस्ताक्षर से इस बाबत एक पत्र जारी किया गया है.
अनुशासन समिति का मानना है कि योगेंद्र साव लगातार सरकार के विरुद्ध बयानबाजी कर रहे थे. चूंकि वर्तमान सरकार में कांग्रेस एक महत्वपूर्ण साझेदार है, ऐसे में सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री और सरकार की नीतियों की आलोचना करना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है.
अनुशासन समिति ने इसे कांग्रेस के नियमों की धारा-04 के विभिन्न उपबंधों का उल्लंघन मानते हुए तत्काल प्रभाव से निष्कासन का आदेश जारी किया है.
पिछले कुछ महीनों से हजारीबाग के बड़कागांव और केरेडारी इलाके में कोन खनन कंपनी, एनटीपीसी और प्रशासन के साथ योगेंद्र साव के टकराव के कई मामले सामने आए हैं. पिछले दिनों योगेंद्र साव का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वे एनटीपीसी के अधिकारियों, कर्मचारियों पर कथित तौर पर अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए तीर चलाते दिख रहे हैं.
गुरुवार को एनटीपीसी की चट्टी बरियातू कोल माइंस क्षेत्र में स्थित योगेंद्र साव के मकान को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया था.
प्रशासन का दावा है कि यह मकान खनन के लिए अधिग्रहित भूमि पर स्थित था और कई नोटिस के बाद भी इसे खाली नहीं किया गया था.
इस कार्रवाई के दौरान योगेंद्र साव की पुत्री और पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने मौके पर पहुंचकर विरोध किया था और आरोप लगाया था कि बिना मुआवजा दिए और न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद भारी पुलिस बलों की मौजूदगी और खौफ के बीच उनकी मां के घर तोड़ा गया.
घर टूटने से आक्रोशित योगेंद्र साव ने सोशल मीडिया पर सीधा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को निशाने पर लिया था.
योगेंद्र साव की बेटी और कांग्रेस की वरिष्ठ विधायक ने भी पुलिस की कार्रवाई पर तीखी प्रति्करिया
19 फरवरी को भी हुआ था बवाल
पिछले 19 फरवरी को हजारीबाग के केरेडारी में जमीन अधिग्रहण के बदले मुआवजे को लेकर डेढ़ महीने से चल रहे आंदोलन के बीच कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री योगेन्द्र साव, उनकी पत्नी पूर्व विधायक निर्मला देवी समेत कुछ समर्थकों को पुलिस के द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद भी टकराव देखने को मिला था.
केरेडारी में कोयला खनन परियोजनाओं को लेकर जमीन अधिग्रहण के मामले में मुआवजे की मांग को लेकर , योगेन्द्र साव बीते एक दिसंबर 2025 से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे.
धरना, विरोध- प्रदर्शन को लेकर कई दफा पुलिस और प्रशासन के साथ कई मौके पर उनकी नोंक-झोंक भी होती रही है.
19 फरवरी को दिन करीब पौने चार बजे दोनों नेताओं को केरेडारी थाना और पगार ओपी पुलिस ने ऋत्विक कोल माइंस कार्यालय के समीप कर्बला स्थित धरनास्थल से उठाया. फिर पुलिस उन्हें लेकर केरेडारी थाना पहुंची. इसकी जानकारी मिलने के बाद अंबा प्रसाद रात भर थाने में डटी रही.
इस घटना के बाद योगेंद्र साव और अंबा प्रसाद ने दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की थी.
2009 से 2024 तक
गौरतलब है कि योगेंद्र साव 2009 में बड़कागांव से चुनाव जीते थे. इसके बाद 2024 में उनकी पत्नी निर्मला देवी बड़कागांव से जीतीं. 2029 में बेटी अंबा प्रसाद ने बड़कागांव में जीत का झंडा गाड़ा.
2024 के चुनाव में वे बीजेपी के रोशन लाल चौधरी से चुनाव हार गईं. अभी अंबा प्रसाद कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव होने के साथ युवाओं के बीच तेज तर्रार नेता मानी जाती हैं.
लेकिन कोल खनन, विस्थापन, जमीन अधिग्रहण जैसे सवाल पर अंबा की भी खनन कंपनियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कथित विवाद की खबरें आती रही हैं.
