जमशेदपुरः सारंडा को सेंक्चुरी के तौर पर अधिसूचित करने के मामले में बुधवार को सुप्रोम कोर्ट में सुनवाई है. कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को हाजिर होने को पहले ही कहा है.
इस बीच जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय लगातार इन बातों पर जोर देते रहे हैं कि सारंडा को सेंक्चुरी के तौर पर अधिसूचिच करने के सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बावजूद सरकार जनता के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिशों में जुटी है. सरयू राय इसके पक्षधर हैं कि सारंडा को सेंक्चुरी अधिसूचित करने में विलंब नहीं होना चाहिए.
उन्होंने कहा है कि सारंडा के संबंध में झारखंड सरकार को स्पष्ट प्रतिवेदन जनता के सामने रखना चाहिए. सरकार के भीतर वन, खान, उद्योग, वित्त विभागों के भीतर व्याप्त विरोधाभास को दूर करना चाहिए.
सरयू राय के तर्क और तथ्य
सरयू राय ने का कहना है कि सारंडा में लौह अयस्क का खनन 1909 से हो रहा है. सारंडा के बारे में वन विभाग ने अबतक तीन महत्वपूर्ण वर्किंग प्लान तैयार किया है. पहला वर्किंग प्लान 1936 से 1956 तक की लिए एसएफ मुनी का बनाया हुआ है.
दूसरा वर्किंग प्लान 1956 से 1976 तक चला, जिसे जेएन सिन्हा ने बनाया था. तीसरा वर्किंग प्लान 1976 से लेकर 1996 तक चला, जिसे राजहंस ने बनाया था. सरकार को चाहिए कि तीनों वर्किंग प्लान का अध्ययन करे और यह भी बताए कि 1996 के बाद सारंडा के लिए कोई वर्किंग प्लान राज्य सरकार ने क्यों नहीं बनाया? इन तीनों वर्किंग प्लान में विस्तार से सारंडा में वन भूमि के संरक्षण और खनन गतिविधियों के बारे में विस्तृत ब्यौरा है.
उन्होंने कहा है कि 2011 में भारत सरकार के निर्देश पर झारखंड सरकार ने इंटीग्रेटेड वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट प्लान बनाने के लिए एक समिति बनाई. उस समिति ने साल भर के बाद रिपोर्ट दी. इस समिति की रिपोर्ट पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. इसमें लौह अयस्क खनन के संदर्भ में वन्यजीवों के संरक्षण और वनों के संरक्षण का विस्तृत उल्लेख है.
उन्होंने बताया है कि भारत सरकार ने 2014 में सारंडा का कैरिंग कैपेसिटी के बारे में अध्ययन के लिए एक बहुआयामी विशेषज्ञों का समूह बनाया था. इस समूह ने सारंडा वन क्षेत्र में खनन एवं अन्य आर्थिक गतिविधियों का अध्ययन किया कि ऐसी कितनी आर्थिक गतिविधियों का बोझ सारंडा बर्दाश्त कर पाएगा. इस प्रतिवेदन पर भी सरकार चुप रही. कुछ नहीं किया. और अब जब सुप्रीम कोर्ट ने सारंडा को सेंक्चुरी के तौर पर अधिसूचित करने के लिए सख्त रुख अख्तियार किया है, तो बचाव में भ्रम पैदा करने की कोशिशें की जा रही है.
