रांचीः झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस आर मुखोपाध्याय की अदालत ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर पाकुड़ में पत्थर खनन के लिए पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त करने मामले में मंत्रिमंडल निगरानी विभाग को प्रारंभिक जांच पर निर्णय लेने के लिए चार हफ्ते का समय प्रदान किया है.
अदालत ने उक्त आदेश के साथ ही याचिका को निष्पादित कर दिया है.
इस मामले में एसीबी की ओर से प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज करने के लिए मंत्रिमंडल निगरानी विभाग को पत्र लिखा गया था.
इस संबंध में प्रार्थी पंकज कुमार यादव ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसमें आरोप लगाया था कि आठ खनन पट्टाधारकों ने पाकुड़ जिला खनन पदाधिकारी के प्रमाणपत्र में फेरबदल करके और राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (सिया) के अधिकारियों से मिलीभगत करके पर्यावरण अनुमति प्राप्त कर ली, जो दंडनीय अपराध है.
मिलीभगत कर अवैध खनन
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता राजीव रंजन तिवारी ने कहा कि इन पट्टाधारकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया जाए, क्योंकि इन्होंने फर्जी दस्तावेज और सिया के अधिकारियों की मिलीभगत कर एक साल तक खनन किया, जिससे राज्य सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ.
कोर्ट को बताया गया कि इन कंपनियों का सिर्फ खनन पट्टा निरस्त किया गया, जबकि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जानी चाहिए.
सरकार की ओर से अधिवक्ता गौरव राज ने अदालत को बताया कि प्रार्थी की शिकायत पर पट्टाधारकों के लाइसेंस पहले ही निरस्त किए जा चुके हैं.
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने दो सितंबर 2025 को पत्र के माध्यम से प्रारंभिक जांच दर्ज करने की अनुमति के लिए मंत्रिमंडल निगरानी विभाग से पत्राचार किया था, लेकिन अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है.
इसके बाद अदालत ने मंत्रिमंडल निगरानी विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया कि वे दो सितंबर के पत्र पर चार सप्ताह के भीतर विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई करें.
