रांची। झारखंड हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में आधी या एक तिहाई सजा काटने वाले कैदियों की रिहाई से संबंधित जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई.
सुनवाई के बाद अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वह प्रार्थी को ऐसे कैदियों का आंकड़ा साफ्ट प्रति के रूप में उपलब्ध कराए.
कोर्ट ने प्रार्थी को इसका अध्ययन कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. मामले में अगली सुनवाई 30 अप्रैल को होगी।
इससे पहले मामले में राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल किया गया. जेलों में बंद आधी सजा या एक तिहाई सजा काटने वाले कैदियों का आंकड़ा प्रस्तुत किया गया.
सरकार की ओर से कहा गया कि विभिन्न जेलों में आधी या एक तिहाई सजा काट लेने वाले 333 कैदी हैं. जिसमें गुमला जेल में 77, जामताड़ा में दो, कोडरमा में दो, लातेहार में 43, लोहरदगा में 23, पाकुड़ में 14, साहिबगंज में आठ, साकची जेल में दो, सरायकेला में 25, सिमडेगा में 20, हजारीबाग में एक, घाटशिला में 27, खूंटी में 53, मधुपुर में सात, राजमहल में 14, रामगढ़ में 11, तेनुघाट (बोकारो) में चार कैदी शामिल हैं.
बता दें कि मामले को लेकर स्टेन स्वामी एवं अन्य की ओर से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई. पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में राज्य के जिलों में बंद आधी सजा या एक तिहाई सजा काटने वाले कैदियों के मामले को राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड के समक्ष रखने और इसपर विचार करने को कहा था.
