रांचीः झारखंड की सियासत और सत्ता में उलटफेर की संभावना तथा जेएमएम की बीजेपी से नजदीकी को लेकर तमाम अटकलबाजी और कयासों को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य के वित्त और संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने खारिज किया है. इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि दूर- दूर तक इसकी कोई संभावना नहीं है. आखिर ये बातें निकली कहां से.
गुरुवार को विधानसभा में शीतकालीन सत्र को लेकर स्पीकर की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक आहूत थी. इसमें संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर भी शामिल थे. इस बैठक के बाद मीडिया ने उनसे सरकार के खजाना और सियासत में अटकलों को लेकर कुछ सवाल किए.
हेमंत सोरेन के बीजेपी से नजदीकी के कयास और चर्चाओं को कांग्रेस नेता ने सिरे से खारिज किया है. उन्होंने कहा, आखिर यह बात कहां से निकली, यह मुझे समझ में नहीं आता है. कुछ लोगों को दिन में सपना देखने की आदत हो गई है. माइनस- माइनस प्वाइंट तक भी इसकी संभावना नहीं है. कोई कहता है कि राज्य का खजाना खाली है तो वित्त मंत्री हम हैं, कोई हमसे पूछे की वास्तविक स्थिति क्या है.
किशोर ने कहा, “राज्य सरकार के पास किसी भी योजना के लिए समुचित अर्थव्यवस्था है. पैसे की कोई कमी नहीं है. अगर राशि की कोई कमी दिखाई भी पड़े तो जो फिजिकल रिस्पांसिबिलिटी का एक्ट है, जो हमें यह अवसर देता है किसी भी राज्य को कि तीन प्रतिशत तक कर्ज ले सकते हैं. अभी भी हमारे पास स्पेश है कि 18 से 20 हजार करोड़ बाजार से ऋण ले सकते हैं और इसके बाद भी लोग कह रहे हैं कि पैसे की कमी है.”
केंद्र सरकार का सहयोग नहीं
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने यह भी जोर देकर कहा कि झारखंड के लिए जो भारत सरकार का आर्थिक सहयोग होना चाहिए, वह हमें नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा कि केंद्र प्रायोजित योजना के तहत जो राज्य की हिस्सेदारी होती है, चाहे वह अनुदान की राशि हो या मनरेगा या राष्ट्रीय दिव्यांग योजना के तहत इन तमाम योजनाओं की राशि समय पर नहीं मिल रही है. यदि यह हमें मिल जाए तो झारखंड को आगे हम ले जा सकते हैं.
कोयला कंपनियों के पास राज्य का 1 लाख 36 हजार करोड़ बकाया है. कोयला मंत्री से मुलाकात के दौरान हमने कहा भी था कि हमारी जो मांग 1 लाख 36 हजार करोड़ की है, उस पर या तो आप अपने अधिकारी को यहां भेजें या हमारे अधिकारी वहां जाए, साथ बैठकर हिसाब कर लें. जो भी वास्तविक बकाया होगा वह निकल जायेगा.
