सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि आधुनिक समय में युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है और अब यह “मल्टी-डोमेन” बन गया है, जिसमें जमीन, हवा, समुद्र, साइबर, अंतरिक्ष और सूचना जैसे कई क्षेत्रों में एक साथ संघर्ष होता है.
सेना प्रमुख ने ‘रण संवाद’ कार्यक्रम में कहा कि अब युद्ध केवल सीमा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अलग-अलग स्तरों पर एक साथ लड़ा जाता है. ऐसे में विभिन्न क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल बनाना सबसे महत्वपूर्ण हो गया है.
सेना प्रमुख ने कहा कि भविष्य के युद्ध के लिए सेना को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा, संसाधनों का बेहतर वितरण करना होगा और हर स्तर पर तेज व प्रभावी प्रतिक्रिया देने की क्षमता विकसित करनी होगी.
उन्होंने बताया कि आज दुनिया एक तरह के निरंतर संघर्ष के दौर में है, जहां हर टकराव औपचारिक युद्ध के रूप में घोषित नहीं होता, लेकिन अलग-अलग रूपों में जारी रहता है.
सेना प्रमुख के अनुसार, आज के सैन्य कमांडरों को केवल अपने पारंपरिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें साइबर, अंतरिक्ष और सूचना जैसे क्षेत्रों की भी समझ होनी चाहिए, ताकि वे पूरी स्थिति का सही आकलन कर सकें.
तकनीक से बढ़ी क्षमताएं
उन्होंने कहा कि अब छोटे स्तर के अधिकारियों के पास भी ड्रोन, निगरानी उपकरण और साइबर नेटवर्क जैसे आधुनिक साधन उपलब्ध हैं, जिससे उनकी निर्णय क्षमता और प्रभावशीलता बढ़ी है.
सेना प्रमुख ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उदाहरण देते हुए बताया कि सेना, वायुसेना और नौसेना के समन्वित प्रयास से ही सफलता मिली. उन्होंने कहा कि अब कोई एक बल अकेले युद्ध नहीं जीत सकता.
उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक का उपयोग जरूरी है, लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा इंसान के हाथ में रहना चाहिए.
