पलामूः झारखंड में पलामू टाइगर रिजर्व एवं वन विभाग की संयुक्त टीम ने सफलतापूर्वक ट्रेंकुलाइज करते हुए एक घायल हाथी का इलाज किया है.
पलामू टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना ने बताया है कि हाथी की हालत में तेजी से सुधार है.
वन अधिकारी जेन के ही नेतृत्व में हाथी को ट्रेंकुलाइज किया गया और उसका इलाज किया गया है.
उन्होंने बताया है कि 18 फरवरी को पीटीआर के बेतला नेशनल पार्क इलाके में एक हाथी को वनकर्मियों ने लंगड़ाते हुए देखा था. हाथी के पैर में जख्म बने थे.
इसकी सूचना के बाद वन विभाग के अधिकारियों को शिकार को लेकर भी आशंका बनी थी.
बीमार हाथी का पलामू टाइगर रिजर्व के अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम ने ट्रैक करना शुरू किया.
जख्म वाले निशान को सबसे पहले मेटल डिटेक्टर से जांच किया गया. इस दौरान यह जांच किया गया था कि कहीं शिकारी ने हाथी को गोली तो नहीं मारी है लेकिन इसका कोई सबूत नहीं मिला. हाथी के पैर में लकड़ी घुस जाने के कारण जख्म हो गया था.
को वन्य जीव के इलाज में बड़ी सफलता मिली है. पलामू टाइगर रिजर्व की टीम ने पहली बार किसी हाथी को ट्रेंकुलाइज कर उसका इलाज किया है. इससे पहले किसी भी वन्य जीव हाथी एवं बाघ के इलाज के लिए कर्नाटक, असम, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट समेत दूसरे राज्यों के एक्सपर्ट को बुलाया जाता था.
18 फरवरी को पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला नेशनल पार्क इलाके में एक हाथी को वनकर्मियों ने लंगड़ाते हुए देखा था. हाथी के पैर में जख्म बने थे वन विभाग के अधिकारियों को शिकार को लेकर भी आशंका बनी थी. बीमार हाथी को पलामू टाइगर रिजर्व के अधिकारियों और ट्रैक करना शुरू किया. इसके बाद उसे ट्रेंकुलाइज कर इलाज किया गया.
टीम ने हाथी के जख्म वाले निशान को सबसे पहले मेटल डिटेक्टर से जांच की. टीम ने यह जानना चाहा कि कहीं किसी शिकारी ने हाथी को गोली तो नहीं मारी है, लेकिन इसका कोई सबूत नहीं मिला. टीम इस नतीजे पर पहुंची है कि हाथी के पैर में नुकीला लकड़ी घुस जाने के कारण जख्म हो गया था.
वन अधिकारी के मुताबिक झारखंड में इन हाउस पहली बार किसी हाथी को ट्रेंकुलाइज कर इलाज किया गया है. हाथी को ट्रेंकुलाइज कर इलाज करना एक बड़ी चुनौती थी. हाथी के पैर में जख्म थे वह तेजी से चलने में असहाय था. समय पर इलाज नहीं होने से हाथी की जान भी जा सकती थी. हाथी का क्लिनिकल ट्रीटमेंट किया गया. हाथी स्वस्थ है एवं उसके भोजन एवं दवा की व्यवस्था की गई है.
उन्होंने बताया कि टाइगर रिजर्व एवं बेतला नेशनल पार्क के कर्मियों को पहले भी ट्रेंकुलाइज करने और इलाज करने की ट्रेनिंग देश के विभिन्न इलाकों में मिली है.
