रांचीः भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि राज्य में पेसा कानून के लागू नहीं होने के लिए सीधे तौर पर सत्तारूढ़ दल जेएमएम और कांग्रेस जिम्मेदार है. एक आदिवासी नेता के मुख्यमंत्री रहते आदिवासी समाज अपने हक और अधिकार से वंचित हो रहा है.
प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत में रघुवर दास ने कहा कि संविधान की दुहाई देने वाली कांग्रेस झामुमो की सरकार राज्य के आदिवासियों ,पिछड़ों के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रही है।
भाजपा की सरकार ने राज्य में पेसा कानून लागू करने की दिशा में सार्थक पहल किए थे। प्रक्रिया आगे बढ़ी. भाजपा सरकार के बाद हेमंत सरकार ने विभागों से प्राप्त मंतव्य विधि विभाग में भेजा.आगे महाधिवक्ता ने कैबिनेट में ले जाने का मार्ग भी प्रशस्त कर दिया लेकिन मंशा साफ नहीं होने के कारण यह सरकार इसे लटका और भटका रही है।
उन्होंने कहा कि पेसा कानून अधिसूचित क्षेत्र की रूढ़िवादी ग्राम सभा को लघु खनिज,बालू,पत्थर के उत्खन,नीलामी,तालाबों में मछली पालन, केंदू पत्ता,आदि के प्रबंधन का अधिकार देती है.यही कारण है कि हाइकोर्ट ने भी इसी भावना के मद्देनजर बालू घाटों की नीलामी पर रोक के निर्देश दिए हैं. उन्होंने न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए पेसा कानून के लागू होने तक इसे जारी रखने का आग्रह किया.
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि पेसा नियमावली लागू नहीं करने के पीछे सरकार का अपना निहित स्वार्थ है. हेमंत सरकार चाहती है कि राज्य के खनिज संसाधनों,बालू,पत्थर को बिचौलिए दलाल लूटते रहें.
राज्य में लंबित नगर निकाय चुनाव पर बोलते हुए श्री दास ने कहा कि हेमंत सरकार न गांव का विकास चाहती है और न शहरों का. नगर निकाय चुनाव नहीं कराकर सरकार प्रतिवर्ष 1800 करोड़ के केंद्रीय अनुदान से झारखंड को वंचित रख रही है. जबकि पेसा नहीं लागू होने के कारण 1400 करोड़ की क्षति हो रही.
