रांची: जामताड़ा के सहकारिता पदाधिकारी को आदिम जनजातियों के लिए आवंटित होने वाले करीब एक करोड़ के सरकारी राशन को बाजार में बेच देने और गबन के आरोप में सस्पेंड कर दिया है. उनके खिलाफ प्रपत्र क भी गठित किया गया है.
संसदीय कार्य मंत्री ने निलंबन की कार्रवाई को लेकर विधानसभा में यह घोषणा की.
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 11 मार्च को खाद्य आपूर्ति विभाग की अनुदान मांगों पर वाद-विवाद के दौरान इस मसले को उठाया था.
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्ट पदाधिकारियों को बचाती है. यही वजह है कि खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विधानसभा क्षेत्र बरहेट के पतना में एक पदाधिकारी ने आदिम जनजाति के हिस्से के राशन को खुले बाजार में बेच दिया. राशन की कीमत एक करोड़ रुपये से ज्यादा थी. उन्होंने आश्चर्य जताया कि जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद उस पदाधिकारी की फिर दूसरे जिले में पोस्टिंग हो गई.
संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि बरहेट में पोस्टिंग के दौरान संबंधित पदाधिकारी को गबन का दोषी पाए जाने के बाद इन्हें सहकारिता विभाग के मुख्यालय में तबादला कर दिया गया. लेकिन यहां भी उनकी कार्यशैली सवालों के घेरे में रही.
इसके बाद उन्हें जामताड़ा में सहकारिता पदाधिकारी के रूप में पदस्थापित किया गया. मामला गंभीर है. इसलिए उक्त अफसर को सस्पेंड किया जाता है.
