रांचीः सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने रांची में गुरुवार को विभिन्न स्कूलों के बच्चों से राजभवन में आयोजित ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर विशेष संवाद कार्यक्रम में स्कूली बच्चों से बातचीत की. और उनके सवालों के जवाब भी दिए. इस कार्यक्रम में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ भी मौजूद थे.
गुरुनानक स्कूल के कक्षा 10 के छात्र फैज ने सीडीएस से पूछा कि भारतीय सेना को कैसे पता चला कि पहलगाम हमला पाकिस्तान से हुआ था. इस पर सीडीएस अनिल चौहान ने कहा यह जानने के कई कारक शामिल थे. एक संगठन टीआरएफ ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसका अतीत में लश्कर-ए-तैयबा से करीबी संबंध रहा है. हालांकि बाद में उन्होंने डेटा हटा दिया, लेकिन इंटेलिजेंस टीम ने उसे मॉनिटर कर रिकवर किया.
चौहान ने कहा कि इस हमले से जुड़े कई अन्य तथ्य भी थे, जिन्हें मीडिया में पहले ही प्रस्तुत किया जा चुका है. इस कार्यक्रम में विभिन्न स्कूलों के बच्चों ने कुल छह सवाल पूछे. इनमें आधुनिक युद्ध में सशस्त्र बलों को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, ऑपरेशन सिंदूर से भारत की स्थिति नियंत्रण रेखा पर कैसे बदली, और इस ऑपरेशन से सशस्त्र बलों ने क्या सबक सीखे, जैसे सवाल शामिल थे.
सभी सवालों का सुलझे तरीके से जवाब देते हुए सीडीएस ने बच्चों को संतुष्ट किए. उन्होंने कहा, “युद्ध की प्रकृति लगातार बदलती रहती है, खासकर तकनीक के कारण. अगला युद्ध कैसे होगा, यह हमेशा रहस्यमय रहता है.”
उन्होंने बताया कि नियंत्रण रेखा 1947 के बाद विकसित हुई. पहले इसे युद्धविराम रेखा कहा जाता था. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारी सीमा पार गोलीबारी हुई थी और हमारी सेना ने जम्मू-कश्मीर और पंजाब में 7-8 कैंप तबाह किए थे.
सीडीएस चौहान ने आगे कहा कि इस युद्ध से कई सबक मिले, जिनमें सबसे अहम है कि सेना, वायुसेना और नौसेना के बीच और बेहतर समन्वय की जरूरत है और अगली बार इसे लागू करने का प्रयास किया जाएगा.
सीमा के साथ सपनों और भविष्य की सुरक्षा
राज्यपाल संतोष गांगवार ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय सेना केवल हमारी सीमा की रक्षा नहीं करती, बल्कि हमारे सपनों और भविष्य की भी सुरक्षा करती है. हमारे वीर जवान विषम परिस्थितियों में भी राष्ट्र की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं.
राज्यपाल ने बच्चों से कहा, “जीवन में आप चाहे किसी भी क्षेत्र में काम करें, बड़े होकर डॉक्टर या इंजीनियर बनें, लेकिन सबसे जरूरी है कि अच्छे इंसान और देशभक्त नागरिक बनें.”
उन्होंने कहा कि झारखंड बलिदानों की भूमि रही है, जहां से स्वतंत्रता सेनानी, शहीद और वीर सपूत निकले. आजादी की लड़ाई में यहां के नौजवानों और लोगों ने बड़ी कुर्बानी दी है, जो हमें प्रेरित करती है. उन्हें पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में राज्य के युवा देश की रक्षा के लिए सेना में शामिल होंगे.
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिंग और ड्रॉइंग की सराहना की. उन्होंने कहा कि इसमें दिखा मोटिवेशन अद्भुत था. सेठ ने बताया कि उनकी योजना करीब 175 स्कूलों में जाने की है. उन्होंने कहा कि कल से ईस्ट टेक शुरू हो रहा है. उनका उद्देश्य साफ है कि झारखंड के लोग और झारखंड के बच्चे सशस्त्र बलों का हिस्सा बनें और देश की सेवा में योगदान दें.
