रांचीः झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आर्युविज्ञान संस्थान (रिम्स) की जमीन अवैध तरीके से बेचने के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है.
झारखंड हाइकोर्ट के निर्देश पर दर्ज प्राथमिकी के बाद जांच एजेंसी ने यह कार्रवाई की है.
एसीबी ने इस मामले में राजकिशोर बड़ाइक, कार्तिक बड़ाइक, राजेश कुमार झा और चेतन कुमार को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. इनमे राजकिशोर और कार्तिक सगे भाई हैं.
जांच एसेंजी ने एक बयान जारी कर कहा है कि गिरफ्तार आरोपियों के द्वारा गलत तरीके से वंशावली बनाकर रिम्स के लिए अधिग्रहित जमीन को धोखाधड़ी कर खरीद-बिक्री की गई. जांच के दौरान कई साक्ष्य मिले हैं. आगे की कार्रवाई जारी है.
हाइकोर्ट के आदेश पर
गौरतलब है कि पिछले 21 दिसंबर को झारखंड हाइकोर्ट ने राजेंद्र आर्युविज्ञान संस्थान (रिम्स) परिसर से अतिक्रमित अवैध निर्माण को हटाए जाने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए प्राथमिकी दर्ज कर एसीबी से जांच कराने का आदेश दिया है.
इसके साथ ही कोर्ट ने राजस्व अधिकारियों, रांची नगर निगम के अधिकारी, रेरा और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच का भी आदेश दिया है.
दरअसल अतिक्रमण हटाए जाने के दौरान एक बड़े अपार्टमेंट और कई पक्के मकानों को भी ध्वस्त किया गया है. इन निर्माण को लेकर प्रभावित लोग सवाल खड़े करते रहे हैं कि इन जमीन पर दाखिल खारिज हो चुका है. रसीद भी कट रहा है. अपार्टमेंट या मकान बनाने के लिए नगर निगम से नक्शा भी पास हुआ है, इसी मामले में कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है कि रिम्स के लिए अधिग्रहित जमीन थी, तो किसी दूसरे के नाम उसका म्यूटेशन कैसे हुआ. कैसे नक्शा पास किया गया. और बैंक वालों ने कैसे लोन दिए. रेरा क्या करता रहा.
