नई दिल्ली: विजयादशमी उत्सव के मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने गुरुवार को नागपुर में अपने भाषण में पहलगाम हमले से लेकर ट्रंप के टैरिफ की चर्चा की. भारत के पड़ोसी देशों में हो रहे विरोध प्रदर्शन का भी जिक्र किया.
आरएसएस इस साल अपनी स्थापना के 100 साल मना रहा है. संघ का इस साल विजयादशमी उत्सव इसलिए भी ख़ास माना जा रहा है. हर साल विजयादशमी के मौके पर संघ प्रमुख नागपुर में संघ मुख्यालय में संबोधन करते हैं.
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी देश में अराजकता की स्थिति में बाहर की ताकतों को अपने खेल खेलने का मौका मिलता है.
इसके साथ ही उन्होंने पड़ोसी देशों के राजनीतिक हालात का ज़िक्र किया और कहा कि ये भारत के लिए चिंता का विषय है. क्योंकि इन देशों से भारत के आत्मीय संबंध रहे हैं.
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने पहलगाम हमले का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत को अपनी सुरक्षा के लिए अब सतर्क और तैयार रहना होगा.
संघ प्रमुख ने अपने भाषण में अमेरिकी टैरिफ़ की भी चर्चा की और कहा कि देश को अब आत्मनिर्भर बनना पड़ेगा.
उन्होंने कहा, ”यह साल श्रीगुरु तेगबहादुर के बलिदान का 350वां वर्ष है. हिंद की चादर बनकर जिन्होंने समाज की अन्याय की मुक्ति के लिए अपना बलिदान दिया. ऐसे विभूति का स्मरण इस साल होगा.”
उन्होंने कहा, “आज गांधी जी की भी जयंती है. उनका योगदान अविस्मरणीय है. आजादी के बाद भारत का तंत्र कैसा चले उसके बारे में विचार देने वालों में उनका नाम था.”
मोहन भागवत ने कहा, ”कुछ महीनों पहले पहलगाम दुर्घटना हुई, धर्म पूछकर उनकी हत्या की गई. उसके चलते पूरे देश में क्रोध और दुख था. सेना और सरकार ने पूरी तैयारी से जवाब दिया. सारे प्रकरण में हमारे नेतृत्व की दृढ़ता का चित्र प्रकाशित हुआ. हम सबके प्रति मित्रता रखेंगे लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए सजग रहना होगा.”
मोहन भागवत ने नेपाल, बांग्लादेश समेत भारत के कुछ पड़ोसी देशों में विरोध प्रदर्शनों और आंदोलन की ओर इशारा करते हुए कहा कि जब सरकार जनता से दूर हो जाती है तो लोग सरकार के ख़िलाफ़ हो जाते हैं.
लेकिन नाखुशी जाहिर करने के लिए जिस तरीके का इस्तेमाल होता है उससे कोई लाभ नहीं होता.
उन्होंने कहा, ”अगर हम अब तक की राजनीतिक क्रांतियों का इतिहास देखें तो उनमें से किसी ने भी अपना उद्देश्य कभी हासिल नहीं किया. कम्युनिस्ट सरकारों वाले राष्ट्रों में हुई सभी क्रांतियों ने भी अग्रम राष्ट्रों को पूंजीवादी राष्ट्रों में बदल दिया है. हिंसक प्रदर्शनों से कोई उद्देश्य हासिल नहीं होता, बल्कि देश के बाहर बैठी शक्तियों को अपना खेल खेलने का मंच मिल जाता है.”
अमेरिकी टैरिफ़ पर क्या बोले भागवत
संघ प्रमुख ने अपने भाषण में अमेरिका के टैरिफ़ का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा, “दुनिया एक-दूसरे पर निर्भरता से चलती है किन्हीं दो देशों के बीच संबंध इसी तरह कायम रहते हैं। कोई भी देश अलग-थलग नहीं रह सकता। यह निर्भरता मजबूरी में नहीं बदलनी चाहिए”.
उन्होंने कहा, ”अमेरिका ने जो नई टैरिफ़ नीति अपनाई उसकी मार सभी पर पड़ रही है. यही वजह है कि दुनिया में आपसी संबंध बनाने पड़ते हैं. क्योंकि आप अकेले नहीं जी सकते हैं.”
उन्होंने कहा, ” अमेरिका की ओर से लागू टैरिफ़ नीति उनके अपने हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई है. लेकिन इससे सभी प्रभावित होते हैं. दुनिया एक -दूसरे पर निर्भरता के साथ काम करती है. इसी तरह किन्ही दो देशों के बीच संबंध बनाए जाते हैं. कोई भी देश अलग-थलग नहीं रह सकता. लेकिन हमें स्वदेशी पर भरोसा करने और आत्मिर्भरता पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है.”
