रांचीः झारखंड के गोड्डा में हुए सूर्या हांसदा के एनकाउंटर मामले में स्थलीय जांच और पुलिस अधिकारियों की रिपोर्ट में अलग-अलग तथ्य पाए जाने के बाद मामले को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने गंभीरता से लिया है. इसके साथ ही आयोग ने हांसदा के एनकाउंटर मामले में गृह मंत्रालय भारत सरकार से सीबीआइ जांच की अनुशंसा की है.
आयोग ने इस बाबत गृह मंत्रालय के सचिव को पूरी रिपोर्ट के साथ जांच के लिए पत्र भेजा है. यह पत्र झारखंड सरकार के मुख्य सचिव को भी भेजा गया है.
भारतीय जनता पार्टी के राज्य सभा सदस्य दीपक प्रकाश ने आयोग की इस कार्रवाई के बारे में जानकारी दी है. दीपक प्रकाश ने पिछले 16 अगस्त को सूर्या हांसदा एनकाउंटर के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को एक आवेदन देकर इसे गंभीर मामला बताया था. साथ ही निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की थी.
स्थलीय निरीक्षण, जिला प्रशासन गोड्डा से प्राप्त रिपोर्ट के विश्लेषण के पश्चात आयोग ने निम्नलिखित अनुशंसाए की है.
1. मामले की गंभीरता एवं संदेहास्पद परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए गृह मंत्रालय, भारत सरकार, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से विस्तृत जाँच प्रारंभ कराए तथा राज्य सरकार को इसमें पूर्ण सहयोग प्रदान करना सुनिश्चित किया जाए.
2- पीड़ित पक्ष के परिवार को समुचित सुरक्षा, निःशुल्क विधिक सहायता एवं आवश्यक परामर्श सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँ तथा न्यायिक प्रक्रिया में उनकी संक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
3- राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि प्रकरण से संबंधित सभी साक्ष्य साक्ष्य सुरक्षित एवं संरक्षित रहें तथा उनके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न हो।
गौरतलब है कि सांसद दीपक प्रकाश के आवेदन के आलोक में 18 अगस्त को आयोग ने गोड्डा के एसपी, डीसी को पत्र भेजकर रिपोर्ट तलब की थी. 19 अगस्त को गोड्डा के एसपी की रिपोर्ट आयोग को प्राप्त हुई.

इसके बाद 24 अगस्त को आयोग के सदस्य निरूपम चाकमा और डॉ आशा लकड़ा के नेतृत्व में सात सदस्यीय टीम गोड्डा पहुंची. आयोग की टीम ने कामलडोरी (राहबड़िया) पहाड़ निरीक्षण करने पहुंची, जहा सूर्या हांसदा के एनकाउंटर का पुलिस ने दावा किया है. टीम ने घटना स्थल का फोटो और वीडियो के साथ साक्ष्य संकलित की.
गोली के एक भी निशान नहीं मिले
जांच टीम ने पाया है कि घटना स्थल के पास कोई घना जंगल नहीं था. वह एक खुला सा स्थान था. यह भी सुनिश्चित किया गया कि आयोग की कार्यवाही से राज्य पुलिस की चल रही जांच प्रक्रिया में कोई बाधा नहीं पहुंचे.
घटना स्थल पर गोड्डा जिले के डीएसपी जेपीएन चौधरी और अन्य पुलिस अधिकारी मौजूद रहे. हालांकि आयोग की पूर्व सूचना के बावजूद एसआईटी के प्रमुख डीएसपी तथा बोआरीजार, महगामा, ललमटिया के थानेदार नहीं मौजूद रहे. घटना स्थल के आसपास कोई भी गोली चलने के निशान नहीं पाए गए.
घटनास्थल को उचित तरीके से घेराबंदी (सीलिंग) नहीं किया गया था. घटना स्थल पर आसपास गांव क चरवाहे व पशुओं का आवागमन था किंतु क्राइन सीन को संरक्षित नहीं किया गया था.
स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति का कोई स्पष्ट प्रमाण पत्र नहीं दिखा. आसपास के लोगों से पूछा गया तो वे गोलीकांड से अनभिज्ञ थे. आयोग के दौरे के दौरान डीसी एसपी ने घटना स्थल का मुआयना नहीं किया था.
गौरतलब है कि 10-11 अगस्त की दरमियानी रात गोड्डा के बोआरीजोर थाना क्षेत्र के रहड़बड़िया पहाड़ पर सूर्या हांसदा के एनकाउंटर का पुलिस ने दावा किया था. पुलिस उसे एक कुख्यात अपराधी तथा ऑर्गेनाइज्ड गैंग चलाने वाला बताती रही है. दूसरी तरफ विभिन्न आदिवासी संगठन, छात्र, सूर्या के परिजन इसे फर्जी मुठभेड़ बताते हुए सीबीआइ जांच की मांग करते रहे हैं.

पीड़ित परिवार से भेंट
> निरीक्षण उपरांत आयोग की टीम ने मृतक के परिजनों, उनकी पत्नी सुशीला मुर्मू एवं मां से भेंट कर घटनाक्रम एवं परिस्थितियों के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
> सूर्या की मां और पत्नी ने बताया है कि सूर्या हांसदा को जिस दिन गिरफ्तार किया गया था, वे टाय-फायड से ग्रसित थे और वे अपनी मौसी के घर देवघर में अपना इलाज करवा रहे थे.
सूर्या हांसदा की पत्नी एवं मां ने यह भी बताया की इससे पूर्व पुलिस रात को उनके घर में घुसकर धमकाती थे एंव इसका दबाव देती थी कि उसको बुला लो, वर्ना उसका एनकाउंटर कर दिया जाएगा.
> उन्होंने बताया की सूर्या हांसदा लगभग सभी पुराने मामलो में माननीय न्यायालय से बरी हो चुके है और अब वे बहुत ही शांतिप्रिय जीवन जी रहे थे. जबकि पुलिस महकमा बार-बार उन्हें परेशान कर रहा था.
> पीड़ित परिवार ने बताया की उन्हें जानबूझकर इस घटना में शिकार बनाया गया है और उनका मानना है की पुलिस द्वारा सूर्या हांसदा का सुनियोजित तरीके से एनकाउंटर के रूप में उनकी हत्या की गयी है और अब वे न्याय की मांग कर रहे है.

आयोग की अफसरों संग बैठक
24 अगस्त की शाम 06:00 बजे जिला अतिथिगृह, गोड्डा में आयोग की टीम ने उपायुक्त अंजली यादव) एवं एसपी श्री मुकेश कुमार) के साथ बैठक की गई.
> पूर्व सूचना के बावजूद उपरोक्त SIT प्रमुख एवं थाना प्रभारी इस बैठर में भी अनुपस्थित रहे.
> जिला पुलिस अधीक्षक से कारण पूछे जाने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उक्त अधिकारी बैठक में सम्मिलित नहीं होंगे और आयोग जो भी जानकारी चाहता है, वह सीधे उनसे प्राप्त कर सकता है.
> आयोग द्वारा यह पूछा गया कि जब आरोपी व्यक्ति ने निशानदेही पर जाने से पहले यह बताया था की उसने जहां खतरनाक हथियार छिपाए हुए है वहां उसके दस्ते के 10-15 लोग भी छिपे हुए है, तो रात्रि 11 बजे के समय में मात्र आठ पुलिसकर्मियों को ही साथ क्यों भेजा गया, जो घटनाक्रम पर संदेह उत्पन्न करता है. आयोग के इस सवाल पर पुलिस अधीक्षक ने बताया की यह पुलिस अधीक्षक के ऊपर निर्भर करता है की वो कितने लोग भेज रहे है.
> पुलिस अधीक्षक ने यह भी सूचित किया कि राज्य सरकार द्वारा इस प्रकरण की जाँच CID को हस्तांतरित कर दी गई है तथा जिला पुलिस द्वारा अब तक की सभी कार्यवाहियाँ विधि सम्मत की गई हैं.
> इस पर आयोग ने स्पष्ट किया कि घटनास्थल पर उपस्थित पुलिसकर्मियों के बयान एवं उपस्थिति इस प्रकरण की वास्तविक परिस्थितियों को समझने हेतु अत्यंत आवश्यक है.
