रांचीः लोक भवन में गुरुवार को “वतन को जानो” कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग, कुपवाड़ा, बारामुल्ला, बडगाम, श्रीनगर एवं पुलवामा जिलों से आए प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया.
कश्मीरी युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम 2025-26 के अंतर्गत इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा, ‘भारत विविधताओं का देश है, परंतु हमारी आत्मा एक है. भाषा, वेशभूषा और परंपराओं की भिन्नता के बावजूद राष्ट्रीय एकता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है. ऐसे कार्यक्रम आपसी संवाद, विश्वास और समझ को प्रगाढ़ करते हैं तथा भावनात्मक एकता को सुदृढ़ बनाते हैं’.
उन्होंने कहा कि कश्मीर की सांस्कृतिक समृद्धि, प्राकृतिक भव्यता एवं आध्यात्मिक चेतना राष्ट्र की पहचान है. जम्मू-कश्मीर अपनी अनुपम प्राकृतिक सुंदरता एवं समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के कारण ‘पृथ्वी का स्वर्ग’ कहलाता है.
राज्यपाल महोदय ने कहा कि भारत ने सदैव शांति, संयम और संवाद का मार्ग अपनाया है. “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना हमारी संस्कृति का मूल है. उन्होंने कहा नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर में विकास और समान अवसरों का नया अध्याय प्रारंभ हुआ है। अनुच्छेद 370 हटने के पश्चात वहाँ विकास की नई संभावनाएँ सृजित हुई हैं.
राज्यपाल ने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा, कौशल, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति को अपने जीवन का आधार बनाएं तथा ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प को साकार करने में सक्रिय भूमिका निभाएँ.
उन्होंने झारखण्ड की समृद्ध जनजातीय परंपराओं, सरहुल, करमा और सोहराय जैसे प्रकृति-आधारित पर्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि झारखण्ड अपनी सांस्कृतिक विविधता और युवा ऊर्जा के कारण विशेष पहचान रखते हैं. उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रवास युवाओं के दृष्टिकोण को व्यापक बनाएगा तथा वे यहाँ से सौहार्द, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता का सकारात्मक संदेश लेकर लौटेंगे.
