रांचीः झारखंड की लाइफ लाइन स्वर्णरेखा नदी और सरकारी जमीन पर कथित अवैध अतिक्रमण के मामले में मुरी हिंडाल्को वर्क्स सवालों के घेरे में है.
सरकारी भूमि और स्वर्णरेखा नदी के कथित अतिक्रमण के मामले में सीमांकन करने के लिए एक टीम गठित की गई है. इस टीम को साठ दिनों में प्रतिवेदन सौंपना है.
झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में सिल्ली से झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक अमित महतो ने इस मामले में एक सवाल उठाया है. तारांकित प्रश्न में अमित कुमार ने पूछा, क्या यह बात सही है कि हिंडाल्को इंडस्ट्रीज का मुरी वर्क्स द्वारा स्वर्णरेखा नदी और सरकारी जमीन का अवैध अतिक्रमण किया गया है.
अमित कुमार के इसी सवाल के जबाव में सरकार ने बताया है कि हिंडाल्को मुरी वर्क्स रांची के द्वारा सरकारी भूमि और स्वर्णरेखा नदी के अतिक्रमण के बिंदु पर सीमांकन करने के लिए टीम का गठन किया गया है. 60 दिनों में सीमांकन के बाद स्पष्ट प्रतिवेदन किया जा सकता है.
गौरतलब है कि अमित कुमार का यह सवाल 20 फरवरी को आया था. लेकिन किसी टीम के द्वारा सरजमीन पर सीमांकन का काम अभी प्रारंभ किए जाने की खबर नहीं है.
मूरी वर्क्स के लिए रांची जिले के सिल्ली अंचल अंतर्गत मौजा कोकोराना में में कुल 244.18 एकड़ और मुरी तथा लगाम मौजा में 90 एकड़ भूमि अधिग्रण किया गया है. यानी मूरी वर्क्स के लिए कुल 334.18 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गयी है.
अमित कुमार ने यह भी पूछा कि क्या हिंडाल्को मुरी वर्क्स रांची के द्वारा एनजीटी के निर्देशों के विपरीत स्वर्णरेखा नदी के ऊपर निर्माण कार्य किया गया है. सरकार ने जवाब में बताया है कि सीमांकन के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
मुरी स्थित इंडियन एल्युमिनियम कंपनी को भारत की सबसे पुरानी एल्युमिना रिफाइनरी माना जाता है. यह संयंत्र बाद में हिंडाल्को का हिस्सा बना, जिसने 2000 में इंडियन एल्युमिनियम कंपनी (INDAL) का अधिग्रहण किया था.
आदित्य बिरला समूह की प्रमुख धातु कंपनी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज लिमिटेड भारत में एल्युमीनियम विनिर्माण इकाइयाँ बॉक्साइट खनन, एल्युमीना शोधन, कोयला खनन, बिजली उत्पादन और एल्युमीनियम गलाने से लेकर एल्युमीनियम रोलिंग, एक्सट्रूडिंग और फ़ॉइल निर्माण जैसे डाउनस्ट्रीम मूल्यवर्धन तक संपूर्ण मूल्य श्रृंखला को कवर करती हैं.
लेकिन मुरी वर्क्स इंडस्ट्रीज श्रम कानून के उल्लंघन समेत कई मामलों को लेकर अक्सर सवालों के घेरे में रहा है.

रेड मड तालाब की दीवार ढहने का हादसा
साल 2019 में 10 अप्रैल को हिंडाल्को का कास्टिक बांध (रेड मड पॉंड) टूटने की घटना सुर्खियों में रही थी. इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी. कई डंपर, हाइवा व अन्य वाहन मलबे में दब गए. इसके साथ ही बांध की सुरक्षा और रेड मड के परिवहन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए थे. तब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हिंडाल्को फैक्ट्री को सील कर दिया था. तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस हादसे की जांच के भी निर्देश दिए थे.
कार्रवाई क्यों है लंबित
विधायक अमित कुमार ने रेड मड एनएचएआई को भेजने को लेकर पर्यावरणीय स्वीकृति से जुड़ा एक सवाल 24 फरवरी को विधानसभा में उठाया है.
उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या यह बात सही है कि हिंडाल्को इंडस्ट्रीज मुरी रांची को रेड मड एनएचएआई को भेजने के लिए 18.02.25 को पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान की गई थी, लेकिन कंपनी द्वारा रेड मड के परिवहन में शर्तों का पालन नहीं किया जाता है.

सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग ने इस सवाल के जवाब में जानकारी दी है कि मुरी वर्क्स को झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (झारखंड पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड) के द्वारा यह जानकारी दी गई है कि बोर्ड ने 18.02.205 को इस शर्त के साथ पर्यावरणीय स्वीकृति दी गई है कि एक साल के भीतर एनएछएआई या एनएचएआई के विक्रेता/ठेकेदार को 10 लाख टन रेड मड का परिवहन करना होगा और बोर्ड के द्वारा जारी शर्तों का पालन किया जाए.
विधायक के सवाल के जवाब में सरकार ने यह भी बताया है कि कंपनी को दिए गए निर्देश का अनुपालन संतोषजनक नहीं पाए जाने के कारण 20 मार्च 2025 को शो-कॉज किया गया था. वर्तमान में मूरी वर्क्स इकाई पर नियमसंगत कार्रवाई प्रक्रियाधीन है.
जाहिर तौर कार्रवाई एक साल से प्रकियाधीन है. इससे पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं.
