रांचीः बहुचर्चित धनबाद रिंग रोड मुआवजा घोटाला में एंटी करप्शन ब्यूरो ने 17 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इनमें धनबाद के तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी उदयकांत पाठक, तत्कालीन सीओ विशाल कुमार, कानूनगो मिथिलेश कुमार, सहायक लिपिक अनुपमा कुमारी भी शामिल हैं.
दस साल पुराने मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने साल 2016 में इस मामले को लेकर प्राथमिकी दर्ज की थी.
गिरफ्तारी को लेकर एसीबी की अलग-अलग टीम ने एक साथ रांची, देवघर, बोकारो और धनबाद में छापेमारी की थी. पूरी कार्रवाई की मॉनिटरिंग रांची स्थित जांच एजेंसी के हेडक्वार्टर से की जा रही थी. इन छापे में सरकारी लोकसेवकों के अलावा जमीन के बिचौलिये को गिरफ्तार किया गया.
जिन 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें डीएलओ के अलावा तत्कालीन अमीन शंकर प्रसाद दुबे, आलोक बरिय़ार, धनबाद सिविल कोर्ट के अधिवक्ता सुशील प्रसाद के अलावा रवींदर कुमार कुमारी रत्नाकर, दिलीप गोप, फर्जी तरीके से जमीन का मालिक बताने वाला बप्पी राय, तेतुलिया पैक्स के तत्कालीन चेयरमैन रामकृपाला गोस्वामी, अमीन उमेश महतो, अनिल कुमार और काली प्रसाद सिंह के नाम शामिल है.
क्या है मामला
झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार के तहत रिंग रोड निर्माण के लिए हुए भू- अर्जन घोटाले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी. प्राथमिकी में सरकारी लोकसेवकों, जमीन कारोबारियो, दलालों र पैक्स पदाधिकारियों की मिलीभगत से रैयतों की करोड़ों रुपये का मुआवजा हड़पने का मामला दर्ज हुआ था. अनुसंधान में इस बाबत जांच एजेंसी ने कई साक्ष्य जुटाए. यह भी पता चला कि तत्कालीन भू अर्जन पदाधिकारी, सीओ ने अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन किए बिना भुगतान किया.
