रांचीः झारखण्ड की मेगालिथ संस्कृति को वैश्विक मंच पर स्थापित किए जाने की तैयारी है. मुख्यमंत्री दावोस और लंदन के दौरे पर जा रहे हैं. दावोस में होने वाले सम्मेलन में सिर्फ झारखण्ड की औद्योगिक क्षमता से दुनिया को अवगत कराने एवं शिक्षा के उन्नयन के लिए चर्चा नहीं करेंगे. वे झारखंड की मेगालीथ संस्कृति को भी वैश्विक मंच पर उठायेंगे.
सरकार चाहती है कि दुनिया इस बात से भी अवगत हो सके कि झारखण्ड राज्य में सिंहभूम क्षेत्र है, जहां वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी की वह पहली जमीन थी, जो समुद्र से ऊपर उठी थी.
एक ओर यहां के पंक्तिबद्ध मेगालिथ सूर्य की गति और दिन-रात की समयावधि से संबंधित हैं, वहीं दूसरी ओर गुफाओं में प्राचीन काल से अवस्थित भित्ति चित्र और जीवाश्मयुक्त वन प्रांतर एक अद्भुत एवं दुर्लभ भू-दृश्य की निरंतरता का भी निर्माण करते हैं.
वैश्विक मंच पर इसकी भी चर्चा की जाएगी कि झारखण्ड के पत्थर किसी भूले हुए संसार के अवशेष नहीं हैं, बल्कि आज भी जीवंत हैं, जो हजारों वर्षों से चली आ रही विरासत, खगोल विज्ञान और उससे जुड़ी मानवीय चेतना को दर्शाती है.
इन सब को समाहित कर दावोस और यूनाइटेड किंगडम की अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल झारखण्ड में मौजूद पृथ्वी के सबसे पुराने पाषाणों और उसकी सांस्कृतिक निरंतरता का सत्य भी बताएगा, ताकि अब तक उपेक्षित इन मेगालिथ को वैश्विक धरोहर के रूप में पहचान और सम्मान दिलाया जा सके.
गौरतलब है कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड से 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) की वार्षिक बैठक में भाग लेगा.
यह पहला अवसर होगा जब झारखंड का प्रतिनिधि मंडल वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम जैसे वैश्विक मंच पर भाग लेगा. इस सम्मेलन में विश्व के प्रमुख निवेशक, उद्योगपति एवं गणमान्य व्यक्तियों की सहभागिता होगी.
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल 18 से 26 जनवरी 2026 तक दौरे पर रहेगा.
