रांचीः राज्य में हाथियों के हमले बढ़ने और इससे हो रही इंसानी मौतों को रोकने के लिए वन विभाग के अधिकारियों को प्रभावी कदम उठाने को कहा है.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शनिवार को वन एवं पर्यावरण विभाग के अधिकारियों संग बैठक कर हालात की समीक्षा की.
बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जंगली हाथियों के हमलों को हर हाल में रोकने और जान माल की सुरक्षा का निर्देश दिया है.
मुख्यमंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों से कहा कि हाथियों के हमले से आम आदमी की मृत्यु न हो यह वन विभाग सुनिश्चित करे.
इसके साथ ही उन्होंने हाथी के हमले में मृत व्यक्तियों के परिजनों को 12 दिनों में मुआवजा देने का निर्देश दिया.
मुख्यमंत्री ने पिछले पांच वर्ष में हुए मौतों की संख्या एवं मुआवजा से संबंधित डेटा राज्य सरकार को उपलब्ध कराने का निर्देश वन विभाग के अधिकारियों को दिया है.
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के भीतर सभी एलिफेंट कॉरिडोर की मैपिंग की जाए. साथ ही ग्रामीणों को विशेष तकनीकी प्रशिक्षण देकर एलीफेंट रेस्क्यू टीम तैयार की जाए. ग्रामीण क्षेत्र से हाथी के विचलन को रोकने के लिए तमाम उपाय किए जाएं.
उन्होंने ग्रामीणों को मशाल जलाने के लिए डीजल एवं केरोसिन तेल, पुराने टायर, टॉर्च, सोलर सायरन इत्यादि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया ताकि हाथी भगाने में सहूलियत हो सके. वन विभाग प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर जागरूकता अभियान और सुरक्षा के जरूरी उपाय करने करने को कहा गया है.
बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी पी, पीसीसीएफ संजीव कुमार, पीसीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) रवि रंजन, सीसीएफ (वाइल्ड लाइफ) एसआर नाटेश, सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे.
गौरतलब है कि पिछले डेढ़ महीने में चाईबासा, बोकारो, रांची, हजारीबाग, सरायकेला, पूर्वी सिंहभूम, लातेहार के अलग- अलग इलाकों में कम से कम चालीस लोगों की मौत हाथियों के हमले से ही है. ताजा घटना हजारीबाग के चुरचू की है, जहां गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात हाथियों ने सात लोगों को कुचल कर मार डाला है. इनमें दो मासूम बच्चे भी शामिल थे.
