राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सोमवार को बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, राँची में आयोजित ‘एग्रोटेक किसान मेला–2026’ के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों का दायित्व केवल प्रयोगशालाओं में शोध करना ही नहीं, बल्कि उन शोधों को खेतों तक पहुँचाना भी है.
वैज्ञानिकों को किसानों के साथ सीधे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में कार्य करना चाहिए.
उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे गाँवों में जाकर किसानों के साथ मिलकर कार्य करें तथा नई तकनीकों और उन्नत खेती के तरीकों की जानकारी किसानों तक पहुँचाएँ।
उन्होंने कहा कि किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, नवीन शोध तथा उन्नत कृषि पद्धतियों से जोड़ने में इस प्रकार के किसान मेलों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.
राज्यपाल ने कहा कि झारखंड एक कृषि प्रधान राज्य है और यहाँ की मिट्टी में अपार संभावनाएँ हैं. उन्होंने किसानों को परंपरागत खेती के साथ-साथ फल, सब्जी, फूल, औषधीय पौधों तथा बागवानी की खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया.
उन्होंने कहा कि मुर्गीपालन, मत्स्यपालन, बकरीपालन और मधुमक्खी पालन जैसे सहायक व्यवसाय किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.
राज्यपाल ने मोटे अनाजों (श्री अन्न) के बढ़ते महत्व का उल्लेख करते हुए किसानों से रागी (मड़ुआ), बाजरा और ज्वार जैसे पौष्टिक अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा देने का आह्वान किया.
उन्होंने सहजन (मूंगा) जैसे पौष्टिक पौधों के उत्पादन की संभावनाओं पर भी बल दिया. उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय के विद्यार्थी गाँवों को गोद लेकर किसानों को कम भूमि में अधिक उत्पादन एवं आय बढ़ाने के उपायों के बारे में मार्गदर्शन दे सकते हैं.
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस किसान मेले से किसानों को आधुनिक कृषि उपकरणों, नई तकनीकों तथा विशेषज्ञों के साथ संवाद का महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त हुआ होगा.
उन्होंने किसानों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि ‘किसानों की समृद्धि में ही राज्य और राष्ट्र की प्रगति निहित है.‘
राज्यपाल ने इस मौके पर राज्य के कई प्रगतिशील एवं नवोन्मेषी किसानों को सम्मानित भी किया.
