रांचीः ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर के बदले कमीशनखोरी तथा मनी लॉउंड्रिंग के मामले में 14 इंजीनियरों और अधिकारी के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर पीएमएलए कोर्ट ने संज्ञान लिया है.
अब इन भ्रष्ट इंजीनियरों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा. कोर्ट ने इनके नाम समन भेजा है. इसके साथ ही कोर्ट ने अगली सुनवाई 30 अप्रैल तय की है.
जिन इंजीनियरों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा उनमें मुख्य तौर पर पूर्व मुख्य अभियंता सिंगराय टुटी के अलावा राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, कार्यपालक अभियंता संतोष कुमार, अजय कुमार, अजय तिर्की, राजकुमार टोप्पो, अशोक गुप्ता, सिद्धांत कुमार और अन्य शामिल हैं.
सिंगराय टुटी भी रिटायर कर चुके हैं. सेवा काल में वे पथ निर्माण विभाग के अभियंता प्रमुख भी रहे. इससे पहले वे रांची डिवीजन के कार्यपालक अभियंता भी रहे.
ग्रामीण कार्य विभाग में वे कई प्रमुख पदों पर रहे. रिटायरमेंट के बाद वे आजसू पार्टी में शामिल हुए. 2024 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने तमाड़ की सीट जदयू के हिस्से दे दी, तो टुटी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े और बुरी तरह हारे.
क्या है चार्जशीट में
गौरतलब है कि प्नवर्तन निदेशाय ने झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में हुए बहुचर्चित टेंडर घोटाले, कमीशनखोरी तथा मनी लाउंड्रिंग से जुड़े मामले में पिछले महीने कोर्ट में पांचवीं सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल किया है. इनमें और 12 इंजीनियरों को आरोपी बनाया है.
इसके साथ ही ईडी की जांच में यह स्थापित हुआ है कि लगभग 3048 करोड़ के टेंडर के निष्पादन में 90 करोड़ से अधिक के कमीशन तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम, तत्कालीन विभागीय सचिव तथा चीफ इंजीनियर व उनके मातहत इंजीनियरों ने लिए.
ईडी की जांच में यह भी स्थापित हुआ कि ग्रामीण कार्य विभाग, जेएसआरडीए के भीतर एक व्यवस्थित कमीशन-रिश्वतखोरी का रैकेट चल रहा था, जिसके तहत निविदा आवंटन के बदले ठेकेदारों से कुल निविदा मूल्य का 3 प्रतिशत का निश्चित कमीशन वसूला जाता था.
इंजीनियर से मंत्री तक
कमीशन का वितरण मंत्री, सचिव और इंजीनियरों की हैसियत के पदानुक्रम के अनुसार किया गया. इनमें 1.35 प्रतिशत मंत्री को उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल के माध्यम से दिए गए. जबकि 0.65 से 1.0 प्रतिशत विभाग के सचिव को और शेष चीफ इंजीनियक और उनके अधीनस्थ इंजीनियरों को दिए गए.
मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच के क्रम में ईडी ने पाया है कि ये इंजीनियर टेंडर आवंटन में अवैध तरीके से कमीशन की वसूली में लिप्त थे. सुनियोजित तरीके से कमीशन वसूले और जमा किया और उसे सभी संबंधितों, सीनियरों के बीच बांटे गए..
ये सभी आरोपित इंजीनियर झारखंड सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग, ग्रामीण विकास विशेष क्षेत्र व झारखंड राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण से संबद्ध रहे हैं। पांचवी चार्जशीट के साथ ही इस पूरे प्रकरण में आरोपितों की संख्या 36 हो गई है.
