रांचीः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दाल-भात योजना को गरीबों और श्रमिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए राज्य में संचालित 370 दाल-भात केंद्रों की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया है.
उन्होंने कहा कि शहरों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान कर नए दाल-भात केंद्र खोले जाएं. साथ ही मॉडल दाल-भात केंद्र विकसित कर जरूरतमंद लोगों को बेहतर सुविधा के साथ भोजन उपलब्ध कराया जाए.
मुख्यमंत्री ने खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग की समीक्षा बैठक में साफ कहा कि राज्य के गरीब, मजदूर और जरूरतमंद परिवारों तक खाद्यान्न की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
उन्होंने विभागीय योजनाओं को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा तकनीक आधारित बनाने के निर्देश दिए. इसके साथ ही खाद्य आपूर्ति वितरण व्यवस्था में तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और पारदर्शिता सुनिश्चित को कहा है.
इसके साथ ही धोती लुंगी साड़ी योजना का आंकलन कर रिपोर्ट देने को कहा है. गौरतलब है कि धोती लुंगी योजना (जिसे आधिकारिक तौर पर सोना-सोबरन धोती-साड़ी/लुंगी वितरण योजना कहा जाता है) झारखंड सरकार की एक प्रमुख जनकल्याणकारी योजना है. इसके तहत राज्य के गरीब और जरूरतमंद परिवारों को साल में दो बार मात्र ₹10 की अत्यंत रियायती दर पर धोती/लुंगी और साड़ी प्रदान की जाती है.
पीडीएस में लापरवाही खत्म करें
मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली गरीब परिवारों की जीवनरेखा है. ऐसे में राशन कार्ड से जुड़े मामलों का त्वरित निष्पादन किया जाए, नए पात्र परिवारों को योजनाओं से जोड़ा जाए और अपात्र लाभुकों की पहचान कर व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए. उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि खाद्यान्न वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
विशिष्ट जनजाति खाद्यान्न सुरक्षा योजना (पीवीटीजी डाकिया योजना) की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले विशेष रूप से कमजोर जनजातीय परिवारों तक डोर-स्टेप डिलीवरी के माध्यम से नियमित खाद्यान्न पहुंचना सुनिश्चित किया जाए. उन्होंने कहा कि किसी भी जरूरतमंद परिवार को योजना के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए.
अब दलहन भी खरीदेगी सरकार
धान अधिप्राप्ति की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि 60 लाख क्विंटल के लक्ष्य के मुकाबले राज्य में 49.25 लाख क्विंटल धान की खरीद हुई है. बैठक में उन्होंने कारीमाटी के किसान निगम प्रसाद उपाध्याय से ऑनलाइन बातचीत कर भुगतान की जानकारी ली.
किसान ने बताया कि पैक्स के माध्यम से 160 क्विंटल धान बेचने के बाद उन्हें उसी दिन भुगतान मिल गया. मुख्यमंत्री ने इस व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया. इसके साथ ही दलहन की अधिप्राप्ति के लिए राज्य के सिदकोफेड के साथ सामंजस्य बनाकर प्लान सबमिट करने को कहा है.
मुख्यमंत्री ने गोदामों की मरम्मत, नए गोदामों के निर्माण और अनाज के सुरक्षित भंडारण की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए. उन्होंने वर्ष 2026-27 की सभी प्रस्तावित योजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने पर विशेष जोर दिया.
